🪔 "अथ रक्षाबंधनम्" — पूर्णिमा के पावन दिन बांधें रक्षा-सूत्र, जानें स्थानवार मुहूर्त
श्रावण पूर्णिमा शनिवार 9 अगस्त को, कोई भद्रादोष नहीं — रक्षाबंधन के लिए विशेष स्थिर लग्न मुहूर्त घोषित
रीवा मध्यप्रदेश | विशेष रिपोर्ट विंध्य वसुंधरा समाचार
रक्षाबंधन, भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व, इस वर्ष शनिवार, 9 अगस्त 2025 को श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा। यह दिन भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है, जब बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन भद्रा का कोई दोष नहीं है, जिससे पर्व के आयोजन में कोई विघ्न नहीं है। साथ ही इस बार रक्षाबंधन का योग स्थिर वृश्चिक लग्न में बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ, मंगलकारी और रक्षणीय माना गया है। यही कारण है कि अलग-अलग नगरों के लिए स्थान विशेष के अनुसार शुभ मुहूर्त का निर्धारण किया गया है ताकि पर्व धार्मिक मर्यादा के अनुसार सम्पन्न हो सके।
📍 स्थानवार रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त:
🔸 रीवा:
दोपहर 12:54 बजे से 1:30 बजे तक
इस अवधि में बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधें।
🔸 भोपाल:
दोपहर 1:04 बजे से 1:40 बजे तक
यह समय शुद्ध पूर्णिमा तिथि में आता है, अतः रक्षाबंधन के लिए उत्तम है।
🔸 झाबुआ:
दोपहर 1:16 बजे से 1:52 बजे तक
स्थानीय पंचांग के अनुसार यही काल अत्यंत शुभ माना गया है।
इन सभी मुहूर्तों के बाद प्रतिपदा तिथि का प्रवेश हो जाएगा, और शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा में रक्षा-सूत्र बांधना वर्जित होता है। अतः धर्मशास्त्रों, वैदिक नियमों और सौभाग्य की रक्षा की भावना को ध्यान में रखते हुए रक्षा बंधन केवल निर्धारित शुभ मुहूर्तों में ही करें।
🪔 पर्व का महत्व
रक्षाबंधन केवल एक पारिवारिक रस्म भर नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति में रक्षक और संरक्षक के आदर्श का प्रतिनिधित्व करता है। एक समय था जब ऋषि-मुनि भी रक्षासूत्र बाँधते थे — केवल भाइयों को नहीं, बल्कि शिष्यों, राजाओं और वीरों को भी। यह पर्व समाज में विश्वास, सद्भाव और सुरक्षा की भावना को प्रबल करता है।
✍️ आचार्य प्राणनाथ के अनुसार,
रक्षाबंधन को शुद्ध पूर्णिमा तिथि में, शुभ लग्न व उचित मुहूर्त में ही करना चाहिए। यही परंपरा हमारे शास्त्रों, पुराणों और परंपरा का निर्देश है, जिससे जीवन में सुख, सौभाग्य और संतुलन बना रहता है।

