हनुमना वेयरहाउस में खाद पर हंगामा कर्मचारियों ने ताला लगाकर छोड़ा मैदान, किसानों ने सड़क पर लगाया जाम
मऊगंज। जिले में यूरिया खाद की किल्लत अब किसानों के गले की फांस बन चुकी है। हालात मंगलवार को उस समय बिगड़ गए, जब हनुमना वेयरहाउस पर खाद को लेकर किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। सुबह से लंबी उम्मीदभरी कतार में खड़े किसान दोपहर तक खाली हाथ लौटते रहे। भीड़ बढ़ते ही अफरा-तफरी मच गई और झूमाझटकी की नौबत आ गई। स्थिति बिगड़ते देख कर्मचारियों ने गोदाम पर ताला जड़ दिया और मौके से खिसक लिए। गुस्साए किसानों ने इसके बाद नगर की मुख्य सड़क पर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों यातायात ठप रहा।
सुबह से कतार, शाम तक निराशा
जानकारी के अनुसार, मंगलवार भोर होते ही सैकड़ों किसान खाद लेने वेयरहाउस पहुँच गए थे। धान की फसल में खाद डालने का समय निकलने के कारण किसान हर हाल में यूरिया चाहते थे। सुबह से लेकर दोपहर तक वितरण शुरू न होने पर नाराज़गी बढ़ती गई। कई किसानों का कहना था कि वे लगातार चार-पाँच दिनों से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
बुजुर्ग किसान से बदसलूकी, वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने हालात को और तूल दे दिया। इसमें एक बुजुर्ग किसान से मारपीट और गला पकड़कर घसीटने की घटना कैद है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि धक्का देने वाला व्यक्ति कैलाश तिवारी है, जो खुद को भाजपा नेता और समिति का खाद प्रभारी बताता है। किसानों ने यह भी कहा कि समिति परिसर में दलाल सक्रिय हैं और खाद खुलेआम ब्लैक में बेची जा रही है।
कर्मचारियों का पलायन, किसानों का चक्काजाम
किसानों ने जब वितरण में गड़बड़ी पर सवाल उठाए तो हालात बेकाबू हो गए। अफरा-तफरी और धक्का-मुक्की के बीच कर्मचारी शटर गिराकर मौके से भाग निकले। कई घंटे इंतजार के बाद गुस्साए किसानों ने नगर परिषद चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान महिलाएं भी आगे रहीं और कई बुजुर्ग किसान सड़क पर बैठ गए। बच्चों को लेकर महिलाएं भी लाइन में खड़ी देखी गईं।
मौके पर पहुँचे अधिकारी, आश्वासन के बाद खुला जाम
स्थिति बिगड़ने पर एसडीएम रश्मि चतुर्वेदी और टीआई अनिल काकड़े पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी और अनियमितताओं की जांच होगी। देर शाम किसानों ने जाम हटाया और यातायात बहाल हुआ।
नईगढ़ी में भी ब्लैक का खेल
इधर, नईगढ़ी थाना क्षेत्र के बहुती गाँव में भी खाद ब्लैक में बिकने का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, समिति के लिए जा रहा एक ट्रक सुनसान जगह पर रुक गया और 31 बोरी खाद ब्लैक में बेच दी गई। भनक लगते ही किसानों ने ट्रक को घेरकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने ट्रक जब्त कर लिया है।
समितियों में खालीपन, बाजार में भरमार
किसानों का आरोप है कि ट्रकों से खाद जिले में आती है, लेकिन समितियों तक नहीं पहुँचती। वहीं व्यापारियों की दुकानों पर यह ऊँचे दामों पर आसानी से उपलब्ध है। किसान वीरेंद्र मिश्रा ने कहा कि "बाजार में खाद मिल रही है, लेकिन समितियों से हम खाली हाथ लौटते हैं। नकली खाद भी ऊँचे दामों पर बेची जा रही है। यह सीधी-सीधी कालाबाजारी है, जिसमें समिति प्रबंधन की मिलीभगत साफ झलकती है।"
प्रशासन का बचाव
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने सफाई देते हुए कहा कि डबल लॉक सेंटर पर भीड़ अधिक हो जाने से पर्ची सिस्टम लागू किया गया और चार अतिरिक्त काउंटर खोले गए। इसी दौरान कुछ लोग लाइन तोड़कर आगे बढ़ने लगे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कलेक्टर ने दावा किया कि मौके पर राजस्व अमला, तहसीलदार, पुलिस बल और एसडीएम सहित एसपी आर.एस.एस. प्रजापति पहुँचे और हालात नियंत्रित किए। अब वितरण व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
बड़ा सवाल— आखिर खाद जा कहां रही है?
मऊगंज जिले में खाद संकट लगातार गहराता जा रहा है। किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष नृपेन्द्र सिंह पिंटू ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि "किसान अपनी ही फसल बचाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। सवाल यही है कि जब ट्रकों से खाद जिले में आ रही है तो यह किसानों तक क्यों नहीं पहुँच पा रही? समितियों में कमी और बाजार में भरमार— यह तस्वीर सीधे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करती है।"
हनुमना वेयरहाउस का यह हंगामा जिले में खाद संकट की असली तस्वीर उजागर करता है। किसानों की फसलें सूख रही हैं और उनका सब्र अब टूटने लगा है। सवाल यह है कि प्रशासन ठोस कदम कब उठाएगा— या फिर किसान यूँ ही लाइन में धक्के खाते रहेंगे?

