खाद संकट से मचा हाहाकार: अन्नदाता की पीड़ा अनसुनी, दाने-दाने के लिए उठेगी "अन्न क्रांति"
मध्य प्रदेश में अन्नदाताओं की हालत इन दिनों बेहद दयनीय हो गई है। खेतों में मेहनत करने वाला किसान, जो पूरे देश को अन्न देता है, आज खुद खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। मऊगंज, रीवा और आसपास के क्षेत्रों में यूरिया व डीएपी खाद की भारी कमी है। सहकारी समितियों और वेयरहाउसों के बाहर सुबह से ही किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं, परंतु शाम तक उन्हें मायूसी ही हाथ लगती है।
योजनाएँ कागजों पर, खेत सूख रहे
सरकार किसानों को किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जोड़कर करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है। लेकिन किसानों का सवाल सीधा है – “क्या नोट और योजनाओं के पैसे खाकर लोग जीवित रह पाएंगे, जब खेतों से अनाज ही नहीं निकलेगा?” किसानों की यह व्यथा बताती है कि योजनाओं की चमक-दमक तब तक व्यर्थ है, जब तक खाद और बीज समय पर उपलब्ध न हों।
कालाबाजारी और अव्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सूत्रों का कहना है कि कई स्थानों पर खाद की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों से खाद गांवों के बजाय निजी गोदामों में खपाई जा रही है। किसानों को सहकारी समितियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल यह है कि यदि खाद की आपूर्ति समय पर और पर्याप्त हो रही है, तो आखिर किसान क्यों दर-दर भटक रहे हैं? प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की बू इस संकट से साफ झलक रही है।
संकट गहराया तो होगा "अनाज आंदोलन"
ग्रामीण क्षेत्रों से आवाजें उठ रही हैं कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अन्नदाता मजबूर होकर सड़क पर उतरेगा। किसानों का कहना है कि हीरे, जवाहरात, सोना-चांदी और बड़े उद्योग किसी काम के नहीं आएंगे, यदि जनता की थाली से अन्न के दाने गायब हो गए। जिस तरह से वर्तमान समय में खाद के लिए हाहाकार मचा है, वह इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में “अनाज आंदोलन” जैसी स्थिति बन सकती है।
सरकार के लिए चेतावनी की घड़ी
यह संकट केवल मऊगंज या रीवा जिले का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का है। यदि सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती तो हालात और भयावह हो सकते हैं। किसानों की पीड़ा को नजरअंदाज करना सीधे-सीधे अन्न उत्पादन को खतरे में डालना है। और यदि अनाज नहीं होगा, तो यह संकट केवल किसानों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होगा।
विंध्य वसुंधरा समाचार की अपील
हमारी यह जिम्मेदारी है कि किसानों की आवाज को बुलंद करें। विंध्य वसुंधरा समाचार निष्पक्षता, निर्भीकता और प्रमाणिकता के साथ किसानों की पीड़ा जनता और सरकार तक पहुँचाता रहेगा। हमारा आग्रह है कि किसान और जागरूक नागरिक इस तरह के सार्वजनिक मुद्दों को सामने लाएँ, ताकि सरकार सजग हो और अन्नदाता को उसका हक मिल सके।




