दहेज प्रताड़ना के तीन दोषियों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास रीवा न्यायालय ने सुनाया फैसला, अर्थदंड भी लगाया
जिले में दहेज प्रताड़ना के एक संगीन मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन दोषियों को कठोर सजा सुनाई है। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के इटौरा निवासी आरती तिवारी (25) की दहेज उत्पीड़न के कारण हुई आत्महत्या प्रकरण में कोर्ट ने पति, सास और ससुर को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी है। साथ ही तीनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
आत्महत्या से उजागर हुआ दहेज कांड
मामला वर्ष 2022 में हुई आरती तिवारी की शादी से जुड़ा है। बताया गया कि विवाह के बाद से ही पति परमानंद द्विवेदी उर्फ रोहित, ससुर धमेन्द्र द्विवेदी और सास सीमा द्विवेदी लगातार दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करते थे। 1 नवम्बर 2022 को तंग आकर आरती ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
आत्महत्या के बाद हुई पुलिस जांच में यह साफ हो गया कि मृतका को शादी के बाद से लगातार दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का अपराध दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
17वें अपर सत्र न्यायाधीश अनु सिंह की अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास द्विवेदी ने सशक्त पैरवी करते हुए आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। कोर्ट ने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा समाज के लिए अभिशाप है और इसके कारण हो रही आत्महत्याएं हमारे सामाजिक ढांचे पर कलंक हैं। इसलिए दोषियों को कठोर दंड मिलना ही न्यायोचित है।
सजा और दंड
पति परमानंद द्विवेदी,
ससुर धमेन्द्र द्विवेदी और
सास सीमा द्विवेदी
को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में तीनों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

