झिरिया टोल प्लाजा पर तानाशाही और अवैध वसूली ट्रक चालकों ने 13 सितंबर रात 2 बजे सड़क पर लगाया जाम, हंगामा कर जताया विरोध
रीवा। जिले का झिरिया टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। बीती रात 13 सितंबर को लगभग 2 बजे कई ट्रक चालकों ने अवैध वसूली और कर्मचारियों की दबंगई के खिलाफ सड़क पर अपने वाहन तिरछा खड़ा कर जाम लगा दिया। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ और कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
चालकों का आरोप – अंडरलोड वाहनों को भी ओवरलोड बताकर वसूली
ट्रक ड्राइवर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि टोल कर्मचारियों की मनमानी अब चरम पर है। यहां पर अंडरलोड (कम वजन) वाहन को भी जानबूझकर ओवरलोड बताकर रोका जाता है और चालकों से 300 से 500 रुपये तक की जबरन वसूली की जाती है। जो चालक पैसे दे देता है, उसका वाहन तुरंत छोड़ दिया जाता है, जबकि इंकार करने वालों के मोबाइल और वाहन के कागजात तक रख लिए जाते हैं और काटा कराने की धमकी दी जाती है।
महीनों से चल रहा है अवैध कारोबार
ट्रक ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि यह धंधा लंबे समय से लगातार चल रहा है। आए दिन टोल प्लाजा पर छोटे-बड़े विवाद होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन और परिवहन विभाग की चुप्पी ने कर्मचारियों के हौसले बुलंद कर रखे हैं। चालकों का कहना है कि टोल का असली उद्देश्य सरकार के राजस्व की वसूली है, लेकिन यहां व्यक्तिगत स्वार्थ साधे जा रहे हैं।
नियमों की खुलेआम धज्जियां
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जारी नियमों के अनुसार किसी भी वाहन को टोल बूथ पर 10 सेकंड से अधिक रोका नहीं जा सकता। यदि ऐसा होता है तो वाहन को बिना शुल्क दिए आगे बढ़ने की अनुमति है। इसके अलावा कतार कभी भी 100 मीटर से लंबी नहीं होनी चाहिए। लेकिन झिरिया टोल प्लाजा पर इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां वाहनों को मिनटों नहीं बल्कि घंटों तक रोककर खड़ा कर दिया जाता है, जिससे एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों तक को बाधा का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन पर सवाल
जनता और ट्रक ड्राइवरों ने अब जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से सीधा सवाल कर रही है – आखिर इतने लंबे समय से झिरिया टोल प्लाजा पर चल रही अवैध वसूली और तानाशाही पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? लोगों की मांग है कि तुरंत जांच दल गठित कर पूरे मामले की जांच की जाए और दोषी कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि टोल का उद्देश्य जनता को सुविधा देना साबित हो, न कि उन्हें प्रताड़ित करना।



