रीवा पुलिस की सख्त कार्रवाई : बाल श्रम के खिलाफ चला विशेष अभियान, सात नाबालिग श्रमिक मुक्त – नियोक्ताओं पर मामला दर्ज
रीवा। जिले में पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में बाल श्रम के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। रीवा पुलिस की इस कार्रवाई से जिले में फैले बाल श्रम माफियाओं और कानून तोड़ने वाले नियोक्ताओं में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने होटल, ढाबा, फैक्ट्री, मैकेनिक शॉप और कार्यशालाओं में छापामार कार्रवाई करते हुए सात नाबालिग श्रमिकों को बंधन से मुक्त कराया और बाल गृह में सुरक्षित भेजा।
कानून की सख्ती, नियोक्ता निशाने पर
पुलिस ने बाल श्रम कराते पाए गए प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 और किशोर न्याय अधिनियम 2017 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब इन नियोक्ताओं पर कानूनी शिकंजा कसेगा। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि जिले में किसी भी कीमत पर बाल श्रम स्वीकार नहीं किया जाएगा।
समाज के लिए शर्मनाक तस्वीर
रीवा जैसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध जिले में नाबालिग बच्चों को ढाबों, वर्कशॉप और फैक्ट्रियों में काम करते देखना समाज के लिए बेहद शर्मनाक तस्वीर है। बाल श्रमिकों की मासूम आंखों में जहां स्कूल जाने और खेलने की चमक होनी चाहिए, वहां थकान और मजबूरी साफ झलक रही है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के बचपन और भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
पुलिस की तत्परता, बच्चों का संरक्षण
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर सभी बच्चों को मुक्त कराया और उन्हें बाल गृह में भेजा, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें। वहीं, बाल संरक्षण विभाग और सामाजिक संस्थाओं की मदद से उनके पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक की अपील
पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि आमजन भी बाल श्रम रोकने की इस मुहिम में पुलिस का सहयोग करें। यदि कहीं भी नाबालिग बच्चों से जबरन या लालच देकर काम कराया जा रहा हो तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। समय पर दी गई जानकारी से बच्चों को शोषण से बचाया जा सकता है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
विशेष टीम की सराहनीय भूमिका
इस अभियान में रीवा पुलिस की विशेष टीम, श्रम विभाग और सामाजिक संगठनों का संयुक्त सहयोग रहा। टीम ने बच्चों को समझाइश दी और नियोक्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की। पुलिस की इस पहल से यह संदेश गया है कि जिले में बच्चों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी
बाल श्रम केवल पुलिस या प्रशासन की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। गरीबी, अशिक्षा और लापरवाह अभिभावक भी बाल श्रम की जड़ हैं। जब तक समाज इस दिशा में जागरूक नहीं होगा, केवल कानूनी कार्रवाई से हालात नहीं बदल पाएंगे। जरूरत है कि समाज बच्चों को मजदूरी से निकालकर शिक्षा और खेल की मुख्यधारा से जोड़े।

