जिला पंचायत रीवा का भ्रष्टाचार का भवन भरभरा कर गिरा, बाल-बाल बचे सीईओ
सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर के कक्ष की छत गिरी, मीटिंग के दौरान टली बड़ी दुर्घटना
मध्य प्रदेश का रीवा जिला पंचायत कार्यालय एक बार फिर भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता सबूत बनकर सामने आया है। मंगलवार को जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर के कक्ष की छत अचानक भरभरा कर गिर गई। उस समय स्वयं सीईओ कर्मचारियों के साथ बैठक ले रहे थे। गनीमत रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि छत का छज्जा और प्लास्टर गिरकर टीवी एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम के बीचोंबीच आ गिरा। सीसीटीवी की मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए उपकरण भी क्षतिग्रस्त हो गए।
पुराने-नए भवन की हालत जर्जर
यह सिर्फ सीईओ का कक्ष ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत का अधिकांश भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। कहीं दीवारों में चौड़ी दरारें हैं तो कहीं से लगातार पानी का रिसाव होता रहता है। कई कक्षों में छज्जे और प्लास्टर टूटकर नीचे गिर चुके हैं, जिनमें बाहर निकली लोहे की सरिया भी साफ नजर आती है।
गौरतलब है कि महज दो साल पहले तत्कालीन सीईओ संजय सौरभ सोनवड़े के कार्यकाल में भी पुराने प्रशासनिक भवन का गेट और छज्जा भरभरा कर गिर गया था। तब भी कर्मचारी और आमजन बड़ी मुश्किल से बचे थे। इसके बावजूद आज भी क्षतिग्रस्त भवन में नियमित रूप से कार्यालयीन कार्य संचालित हो रहे हैं।
“भ्रष्टाचार के भवन भरभरा कर गिर रहे” – शिवानंद द्विवेदी
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा—
“यह सब भ्रष्टाचार के भवन हैं, जो समय से पहले ही ढह रहे हैं। जब जिला पंचायत के सीईओ खुद अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहे, भवनों की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे, तो वह रीवा और मऊगंज की 820 ग्राम पंचायतों में फैले भ्रष्टाचार पर कैसे कार्यवाही करेंगे?”
वर्षों से लंबित प्रकरण और भ्रष्टाचार का खेल
जिला पंचायत में वर्षों से धारा 40, 89 और 92 के तहत लंबित प्रकरण फाइलों में दबे पड़े हैं। शिकायतें आती हैं, जांच होती है लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल लीपापोती की जाती है। आरोप है कि जिला पंचायत लेखाधिकारी राजेश शुक्ला और सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर की मिलीभगत से कमीशन का खेल वर्षों से जारी है।
अब हालात यह हो गए हैं कि स्वयं जिला पंचायत का भवन ही भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा होकर टूट-टूटकर गिर रहा है और अधिकारी उस पर कोई नियंत्रण नहीं रख पा रहे।
सवाल उठे, जवाब नहीं
जिला पंचायत का यह जर्जर भवन केवल कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ही नहीं बल्कि रोजाना आने-जाने वाली आम जनता के लिए भी खतरा बन चुका है। सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला मुख्यालय पर बैठे आईएएस स्तर के अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो 820 ग्राम पंचायतों की जनता का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?




