फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करोड़ों का भुगतान — सतना लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन ईई पर ईओडब्ल्यू में आपराधिक प्रकरण दर्ज
सी.आर.एफ. योजना के तहत सतना जिले में हुए सड़क निर्माण कार्यों से जुड़ा एक गंभीर घोटाला उजागर हुआ है। आरोप है कि संविदाकार द्वारा प्रस्तुत फर्जी रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र (NOC) के आधार पर लोक निर्माण विभाग, सतना के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री मनोज द्विवेदी तथा संविदाकार एस. आर. कंस्ट्रक्शन (दिल्ली) के विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण (EOW) रीवा में आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। शिकायत के अनुसार शासन को 2 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।
क्या है पूरा मामला — संक्षेप में
वर्ष 2017 में लोक निर्माण विभाग सतना और संविदाकार के बीच 01 मई 2017 को अनुबंध किया गया था। अनुबंध के तहत सेमरिया–बनकुइया मार्ग से गाजन, मझियार, बकिया, भटीगवा, खाम्हा, किचवारिया, खाम्हरिया तक कुल 46.70 किमी सड़कों का निर्माण होना था।
अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्य के चलित देयकों में से ₹2,59,66,580 (दो करोड़ उन्तीस लाख छियासठ हजार पाँच सौ अस्सी) की माइलस्टोन राशि विभाग द्वारा रोक रखी गई थी।
संविदाकार ने कलेक्टर कार्यालय, खनिज शाखा रीवा का बताया गया एक रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र (NOC) विभाग में प्रस्तुत किया। उसी पत्र के आधार पर तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ने रोकित माइलस्टोन राशि के भुगतान की अनुमति दे दी।
जांच में पाया गया कि जिस रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र के आधार पर भुगतान किया गया, वह कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा से जारी होने का सत्यापन नहीं पाया गया — यानी वह पत्र वास्तविक नही
01 मई 2017 — लोक निर्माण विभाग सतना और संविदाकार के बीच अनुबंध निष्पादित।
2017–2022 — सी.आर.एफ. योजना के अंतर्गत उक्त मार्गों पर निर्माण कार्य।
27 जुलाई 2021 — संविदाकार के अंतिम देयक का भुगतान किया गया; इसमें रोकित माइलस्टोन राशि का भुगतान भी शामिल था।
2024 — एडवोकेट बी.के. माला, रीवा द्वारा यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो भोपाल एवं EOW रीवा के समक्ष शिकायत के रूप में प्रस्तुत किया गया।
शिकायत के आधार पर EOW में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना आरंभ की गई है।
प्रमुख आरोप और कानूनी धाराएँ
शिकायत व प्रारंभिक पंजीकरण के अनुसार आरोपियों पर मुख्यतः निम्नलिखित आपराधिक व भ्रष्टाचार-संबंधी आरोप लगाए गए हैं:
(जैसा कि शिकायत/प्राथमिकी में उल्लेखित है) — धारा 120 बी, 409, 420, 487, 468, 471 भादवि; तथा धारा 7सी, 13(1)(ए), 13(2) भ्रनिअ 1968 (संशोधन अधिनियम 2018) के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
नोट: ऊपर बताई गई धाराएँ साजिश, सरकारी धन का गबन, धोखाधड़ी, दस्तावेज़ों में जालसाज़ी व भ्रष्टाचार से संबंधित हैं — जिनके आधार पर EOW आगे की जांच कर रहा है।
क्या हुआ कथित रूप से (विस्तार)
संविदाकार ने विभाग में एक ऐसा पत्र-पत्रक जमा कराया, जिसे कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा से जारी बताया गया। इस पत्र की असलियत की सत्यता का विभागीय लेखाधिकारी ने प्रश्न उठाया था, परन्तु लेखाधिकारी की टीप/आपत्ति को अनदेखा करते हुए तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ने भुगतान स्वीकृति दे दी।
भुगतान के बाद जब कागजात का सत्यापन और फिजिकल रिकॉर्ड चेक किया गया, तो वह पत्र कलेक्टर कार्यालय से जारी हुआ प्रतीत नहीं हुआ — यानी कागजात जालसाज़ी के दायरे में आते हैं।
भुगतान होने से शासन को सीधे आर्थिक क्षति पहुँचने का आरोप है — जिसका अनुमान शिकायत में ₹2 करोड़ से अधिक के रूप में लगाया गया है (रोकित माइलस्टोन राशि ही लगभग ₹2.6 करोड़ है)।
किन-किन कार्यों पर सवाल उठे हैं
सी.आर.एफ. योजना के तहत सतना जिले के विभिन्न खंडों पर बने/बन रहे निम्नलिखित खंड उल्लेखनीय हैं: सेमरिया–बनकुइया मार्ग, गाजन, मझियार, बकिया, भटीगवा, खाम्हा, किचवारिया, खाम्हरिया — कुल लगभग 46.70 किमी। प्रारंभिक जांच में यही वे सेक्शन बताए गए हैं जहाँ भुगतान व रॉयल्टी कागजात से जुड़ी अनियमितताएँ पाई गईं।
शिकायतकर्ता और EOW की कार्रवाई
यह शिकायत एडवोकेट बी.के. माला, रीवा द्वारा वर्ष 2024 में EOW भोपाल तथा EOW रीवा में दर्ज कराई गई थी। शिकायत के आधार पर EOW ने उक्त आरोपों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना आरम्भ कर दी है।
प्राथमिक विवेचना के दौरान कागजात, भुगतान रिकॉर्ड, रॉयल्टी प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता, विभागीय आदेशों और लेखाधिकारी की टीप को देखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी — जिसमें संबंधित व्यक्तियों के बयान, बैंक-लेनदेन की पड़ताल और डॉक्यूमेंट फॉरेंसिक शामिल होने की संभावना है।
EOW की जांच का दायरा विस्तृत हो सकता है — जिसमें विभागीय दोष, साख्यात्मक प्रमाण, बैंक ट्रांजैक्शन, अग्रिम भुगतान का स्रोत व रसीदें, और फर्जी दस्तावेज़ों के निर्माण में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान शामिल होगी।
यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल कर वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और संबंधित पर आपराधिक मुकदमेबाजी संभव है।


