डिजिटल क्लासरूम बना मजाक : मऊगंज कॉलेज में पवन सिंह का गाना बजा, शिक्षा का मंदिर शर्मसार
मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। करोड़ों की लागत से तैयार किए गए प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, मऊगंज के हाई-टेक डिजिटल क्लासरूम में उस समय अजीबोगरीब स्थिति बन गई जब अचानक भोजपुरी गायक पवन सिंह का गाना स्मार्ट बोर्ड पर बजने लगा।
जहां छात्रों को आधुनिक तकनीक के जरिए पढ़ाई करनी चाहिए थी, वहीं शिक्षा के मंदिर में भोजपुरी गानों की गूंज सुनाई दी। यह नजारा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते मामला प्रदेश स्तर तक सुर्खियों में आ गया।
करोड़ों की लागत, लेकिन कक्षा में पढ़ाई नहीं, मनोरंजन!
डिजिटल क्लासरूम योजना को सरकार ने शिक्षा सुधार का बड़ा कदम बताते हुए शुरू किया था। करोड़ों रुपये खर्च कर स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर, हाईस्पीड इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों से कॉलेज को लैस किया गया।
लेकिन हालात यह हैं कि पढ़ाई की जगह इन कक्षाओं का इस्तेमाल छात्र मनमानी और मनोरंजन के लिए कर रहे हैं। इससे न केवल सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि शिक्षा की गंभीरता पर भी गहरी चोट पहुंची है।
छात्रों ने तोड़ा लॉकर, चलाया भोजपुरी वीडियो
जांच में सामने आया कि कुछ छात्रों ने लॉकर तोड़कर प्रोजेक्शन मशीन चालू की और जानबूझकर भोजपुरी गाना प्ले किया। क्लास में बैठे अन्य छात्रों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
घटना की पुष्टि करते हुए शिक्षा विभाग के डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि छात्रों की पहचान उनके ड्रेस कोड से की गई है। मामले में कॉलेज प्राचार्य को कड़ी चेतावनी दी गई है और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
पहले भी वायरल हुआ था डांस वीडियो
यह पहला मामला नहीं है जब इस कॉलेज का नाम विवादों में आया हो। कुछ माह पूर्व भी इसी संस्थान की एक छात्रा का भोजपुरी गाने पर डांस करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। तब भी प्रशासन ने केवल औपचारिक कार्रवाई करके मामला रफा-दफा कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि छात्रों का मनोबल और बढ़ा तथा अब एक बार फिर वही गलती दोहराई गई।
शिक्षा की गरिमा पर गहरा प्रश्नचिह्न
प्रदेश सरकार डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं लागू कर रही है, लेकिन मऊगंज कॉलेज जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि प्रशासनिक लापरवाही और अनुशासनहीनता ने इस उद्देश्य को बेमानी बना दिया है।
छात्रों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के बजाय इस तरह की हरकतें न केवल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं, बल्कि पूरे समाज में गलत संदेश भी देती हैं।
ज़िम्मेदारी किसकी?
क्या यह कॉलेज प्रशासन की लापरवाही है?
क्या शिक्षकों की निगरानी में कमी है?
या फिर यह सरकार की करोड़ों की योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने का परिणाम है
इन सभी सवालों का जवाब तलाशना बेहद जरूरी है, वरना उच्च शिक्षा के नाम पर खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये केवल मनोरंजन और दिखावे तक ही सीमित रह जाएंगे।


