पंचायत विभाग में फिर बड़ा खुलासा: कार्यपालन यंत्री का वीडियो वायरल, जिला पंचायत में रिश्वतखोरी का लगाया आरोप
रीवा, 10 सितम्बर 2025 | स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आए दिन विभाग से जुड़े नित नए खुलासे होते रहते हैं—कहीं तालाबों के चोरी होने के मामले सामने आते हैं तो कहीं अमृत सरोवर और सड़क निर्माण में भारी गड़बड़ियां उजागर होती हैं। मनरेगा जैसी योजना में भी मजदूरों के नाम पर मशीनों से काम कराकर फर्जी मस्टर रोल जारी करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इस भ्रष्टाचार का जवाबदेह कौन है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक कार्रवाई होगी?
टीपी गुर्दवान प्रकरण के बाद नया विवाद
पिछले महीनों ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान के कई वीडियो वायरल हुए थे। इन वीडियो में उन्होंने मंत्रालय तक के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए थे। गुर्दवान ने कहा था कि "ऊपर तक सब बिकाऊ हैं और सबको माल चाहिए"। इसी मामले में उनकी निलंबन की कार्रवाई भी हुई और विभागीय जांच अब तक जारी है।
लेकिन अब एक बार फिर पंचायत विभाग की साख पर बट्टा लगाने वाला नया मामला सामने आया है।
कार्यपालन यंत्री एसबी रावत का वीडियो वायरल
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 के कार्यपालन यंत्री एसबी रावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें रावत स्वयं जिला पंचायत में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में रावत साफ तौर पर कह रहे हैं कि "जिला पंचायत में बाबू और कार्यक्रम अधिकारी रिश्वत लेकर शिकायतों की जांच बदल देते हैं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धारा 40/92 के मामलों में परियोजना अधिकारी (ओआईसी) राजेश शुक्ला सरपंच-सचिव से मनमुताबिक लिखवा लेते हैं और फिर सीईओ से मिलकर जांच टीम बदलवा देते हैं। परिणामस्वरूप लाखों की वसूली के मामलों को यह कहकर दबा दिया जाता है कि "काम पूरा हो गया है, इसलिए वसूली नहीं बनती।"
जिलहंडी पंचायत से जुड़ा है मामला
वायरल वीडियो की पृष्ठभूमि जनपद पंचायत नईगढ़ी की ग्राम पंचायत जिलहंडी से जुड़ी है। यहाँ 68 लाख की वसूली का मामला था, जिसे जांच में बदलकर मात्र 56 हजार दिखा दिया गया।
इसी प्रकरण को लेकर कुछ शिकायतकर्ता ईई रावत से मिले थे। वीडियो में रावत उन्हें स्पष्ट कहते नजर आते हैं—
"यहाँ से कुछ नहीं होगा, मामला रफा-दफा हो जाएगा। आप हाईकोर्ट जबलपुर जाइए।"
यहां तक कि उन्होंने स्वयं अपने विभाग और जिला पंचायत के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतकर्ताओं को अदालत जाने की सलाह दी।
मामला पहुंचा हाईकोर्ट
रावत की सलाह पर ही जिलहंडी पंचायत का मामला हाईकोर्ट जबलपुर पहुंचा। हाईकोर्ट के जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी ने कलेक्टर मऊगंज को निर्देश दिए कि 90 दिनों के भीतर शिकायत पर सुनवाई कर कार्यवाही सुनिश्चित करें।
सूत्रों के अनुसार कलेक्टर स्तर पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है।
बड़ा सवाल: कार्रवाई किस पर होगी?
इस पूरे प्रकरण ने पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या जिला पंचायत में बैठकर शिकायतों को पैसे के दम पर दबाने वाले बाबू और कार्यक्रम अधिकारी अब चिन्हित होंगे?
क्या कार्यपालन यंत्री एसबी रावत पर भी सिविल सेवा आचरण नियम तोड़ने और विभाग की आंतरिक जानकारी सार्वजनिक करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य प्रकरणों की तरह केवल चर्चा का विषय बनकर रह जाएगा?
ईई रावत का यह वीडियो केवल एक व्यक्ति की टिप्पणी नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर सीधा प्रहार है, जिस पर ग्रामीण विकास और करोड़ों की योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुलासे के बाद भ्रष्टाचार के गढ़ पर गाज गिराता है या फिर सच सामने लाने वाले अधिकारी पर ही कार्रवाई करता है।


