मऊगंज में फैली अफवाह की सच्चाई उजागर — सोशल मीडिया पर सरिया डालने का आरोप निकला फर्जी
पुलिस ने प्रेसवार्ता कर दी जानकारी, चोरी के आरोप में हुई थी मारपीट — आरोपी भेजा गया जेल
मऊगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 2 से बीते दिनों सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई एक पोस्ट में स्थानीय युवक सूरज कोल ने आरोप लगाया था कि उसके साथ अमानवीय कृत्य करते हुए उसके गुदा में सरिया डाल दी गई। खबर वायरल होते ही क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया और पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया।
हालांकि, जांच पूरी होने के बाद मऊगंज पुलिस ने इस पूरे मामले की सच्चाई प्रेसवार्ता कर उजागर की — जो वायरल खबर से बिल्कुल विपरीत निकली।
पुलिस जांच में सामने आई वास्तविक कहानी
मऊगंज थाना प्रभारी संदीप भारतीय ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक रीवा के निर्देशन में मेडिकल टीम गठित की गई और पीड़ित का संजय गांधी अस्पताल, रीवा में विस्तृत परीक्षण कराया गया।
मेडिकल रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि युवक के शरीर पर चोटों के निशान अवश्य हैं, परंतु किसी प्रकार की दरिंदगी या “सरिया डालने” जैसी घटना नहीं हुई।
चोरी के शक में हुई थी मारपीट
जांच में यह तथ्य सामने आया कि सूरज कोल नशे की हालत में था और घर लौटते समय गलती से एक व्यक्ति के घर की बांस की बाउंड्री में गिर पड़ा। घरवालों ने उसे चोर समझकर पकड़ लिया और मारपीट कर दी। इसी दौरान युवक को चोटें आईं, जिसके बाद उसने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी प्रसारित कर दी, जिससे पूरे क्षेत्र में अफवाह फैल गई।
पुलिस की तत्परता और सख्त कार्रवाई
मऊगंज पुलिस ने घटना में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ चोरी के संदेह में की गई मारपीट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
थाना प्रभारी संदीप भारतीय ने कहा —
“सोशल मीडिया पर फैली खबरें पूरी तरह भ्रामक और असत्य हैं। चिकित्सा जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान में किसी भी तरह की दरिंदगी का प्रमाण नहीं मिला है। जनता से अपील है कि बिना जांचे परखे किसी भी खबर को वायरल न करें।”
प्रशासन ने दी चेतावनी — अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की झूठी और भड़काऊ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया एक जिम्मेदार मंच है, लेकिन झूठी पोस्ट से न केवल शांति भंग होती है बल्कि निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा पर भी आंच आती है।


