थाना परिसर में फरियादी की बांधकर पिटाई — परिजनों ने लगाया पुलिस पर गंभीर आरोप, हालत बिगड़ने पर भेजा अस्पताल
मऊगंज, रीवा।
मऊगंज पुलिस की मनमानी और अमानवीय चेहरा एक बार फिर उजागर हुआ है। यहां एक फरियादी को पुलिस से न्याय मांगना इतना भारी पड़ गया कि उसे रात के अंधेरे में घर से उठाकर थाना परिसर में बंधक बना लिया गया और बेरहमी से पिटाई की गई। जब हालत बिगड़ी तो आनन-फानन में अस्पताल भेजकर उपचार कराया गया। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, मऊगंज थाना क्षेत्र के पन्नी गांव निवासी मनोज साकेत 15 अक्टूबर की शाम अपने रिश्तेदार विकास साकेत के साथ पन्नी-मकरंद स्कूल के पास अंडा खाने गए थे। इसी दौरान गांव के दो अन्य युवकों से उनका विवाद हो गया। इस झगड़े में मनोज घायल हुआ, जबकि उसका रिश्तेदार विकास साकेत तब से लापता है।
परिजनों के मुताबिक, घटना की सूचना देने के लिए वे उसी रात मऊगंज थाने पहुंचे थे। लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से न लेते हुए दो दिन तक टालमटोल किया। आखिरकार दो दिन बाद केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर कॉपी थमा दी गई।
एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन
थाने की लापरवाही से परेशान परिजन और ग्रामीण 18 अक्टूबर को रीवा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने मऊगंज पुलिस पर गंभीर लापरवाही और पक्षपात का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
परिजनों का आरोप है कि यही शिकायत मनोज साकेत के लिए सजा बन गई।
रात में घर से उठा ले गई पुलिस
शिकायत के कुछ घंटे बाद ही, रात करीब 12 बजे, दो वाहनों में सवार आधा दर्जन पुलिसकर्मी मनोज साकेत के घर पहुंचे। उसे नींद से उठाकर थाने ले गए और महिला ऊर्जा डेस्क के कमरे में रस्सी से हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से पीटा।
परिजनों के अनुसार, पुलिस ने मनोज को घंटों तक बंधक बनाए रखा और पूछताछ के नाम पर नृशंस अत्याचार किया। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तब पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और अगले दिन रात 10 बजे घर छोड़ दिया।
मामले के खुलासे के बाद हरकत में आई पुलिस
घटना जब मीडिया और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तब मऊगंज पुलिस ने आनन-फानन में डायल 112 के दो चालक अमित पटेल और आसुलेश श्रीवास्तव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 396, 115 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब भी मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। घायल मनोज साकेत को दो दिन से पुलिस अपने साथ रखकर उसके घावों को छिपाने की कोशिश कर रही है।
परिजनों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
मनोज के परिजनों का कहना है कि पुलिस की प्रताड़ना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। उन्होंने रीवा कलेक्टर और आईजी से घटना की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मनोज का रिश्तेदार विकास साकेत अब भी लापता है, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है।
जनता में रोष, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता का कहना है कि अगर शिकायत करने वाले के साथ ऐसी बर्बरता हो सकती है, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे?

