मैहर में पत्रकारों पर जानलेवा हमला — भ्रष्टाचार उजागर करने की सज़ा?
पत्रकार मधु गुप्ता और उनकी बेटी मुस्कान गुप्ता पर 8–10 लोगों ने किया हमला, बचाने पहुंचे पत्रकार कमल सिंह परिहार भी घायल — पुलिस पर मिलीभगत और दबाव के गंभीर आरोप
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब यही स्तंभ सच लिखने की कीमत अपने खून से चुकाने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गहरी चिंता का विषय बन जाता है।
मैहर में शुक्रवार की रात हुए पत्रकार मधु गुप्ता और उनकी बेटी मुस्कान गुप्ता पर जानलेवा हमले ने न केवल क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, बल्कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🕯️ क्या था मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार मधु गुप्ता और उनकी बेटी मुस्कान गुप्ता, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकारिता करती हैं, पर कुछ अज्ञात बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया।
घटना के समय मधु गुप्ता ने सहायता के लिए पत्रकार कमल सिंह परिहार को फोन किया। जब वे मौके पर पहुंचे तो उन पर भी 8–10 लोगों ने मिलकर हमला कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम की फुटेज पास लगे सीसीटीवी कैमरे में स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिसमें हमलावरों की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं।
⚖️ भ्रष्टाचार उजागर करने की मिली सज़ा
मधु गुप्ता और उनकी बेटी लंबे समय से मैहर क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार, अवैध व्यवसाय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर निरंतर रिपोर्टिंग कर रहे थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उनकी लगातार सच्ची खबरों से कई प्रभावशाली लोगों के हित प्रभावित हो रहे थे।
इसी रंजिश के चलते यह हमला पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया बताया जा रहा है।
🚨 थाना प्रशासन पर गंभीर आरोप — रिपोर्ट दर्ज नहीं, बल्कि दबाव डालकर मामला दबाने की कोशिश
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के बाद जब पत्रकारों ने रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की, तो मैहर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई।
इसके बजाय थाने के कुछ कर्मचारियों द्वारा पीड़ित पत्रकारों पर मामले को आपसी सुलह से निपटाने का दबाव बनाया गया।
सूत्रों के अनुसार, थाने का पूरा तंत्र “जुए और अवैध वसूली” के मासिक रेट सिस्टम पर चलता है, जिसके कारण ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है।
🏛️ पत्रकारों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मैहर को जिला घोषित हुए कुछ समय बीत चुका है।
अब यहां कलेक्टर और एसपी दोनों का मुख्यालय मौजूद है।
इसके बावजूद, यदि जिले के भीतर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो यह शासन-प्रशासन की बड़ी नाकामी है।
पत्रकारों का कहना है कि वे अब भय के माहौल में काम कर रहे हैं —
> “यदि पत्रकार को ही न्याय नहीं मिलेगा, तो आम जनता की सुनवाई की उम्मीद कौन करेगा?”
🎥 सीसीटीवी फुटेज बनेगा अहम सबूत
घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरा हमला रिकॉर्ड हुआ है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में
पत्रकार पर हमला केवल किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सत्य पर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर हमला है।
यदि प्रशासन अब भी मौन रहा, तो यह मौन अपराधियों के साहस को बढ़ाएगा और पत्रकारिता की जड़ों को हिला देगा।


