📰 सहकारिता से संस्कार तक — सहकार भारती की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक का सफल समापन
स्थान | मां शारदा देवी मंदिर प्रांगण (यात्री निवास क्रमांक 02), मैहर जिला सतना (म.प्र.)
🔹 सहकार के संग संस्कार की साधना — आत्मनिर्भर भारत की राह पर सहकार भारती
मैहर। सहकारिता के आदर्श और संगठन की निष्ठा का जीवंत प्रतीक बनी सहकार भारती की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक का समापन गुरुवार को मां शारदा देवी मंदिर प्रांगण स्थित यात्री निवास क्रमांक 02 में हुआ।
बैठक ने न केवल संगठनात्मक ऊर्जा को नया आयाम दिया बल्कि सहकारिता के माध्यम से समाज में संस्कार, समरसता और स्वावलंबन के संकल्प को भी मजबूत किया।
🔹 उद्घाटन सत्र — “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार”
बैठक के अंतिम दिन के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मनगवा विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
सत्र में सहकार भारती के राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र गौतम, प्रदेश महामंत्री राकेश चौहान एवं प्रदेश उपाध्यक्ष सचिन ताम्रकार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेश महामंत्री राकेश चौहान ने सहकार भारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा —
“सहकारिता का मूल लक्ष्य है — व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास।”
उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक संगठन नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और नैतिकता का प्रतीक है।
🔹 सहकारिता और पर्यावरण का अद्भुत संगम
राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र गौतम ने अपने संबोधन में सहकारिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को जोड़ने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा —
“सहकार भारती का उद्देश्य केवल संस्थान चलाना नहीं, बल्कि संस्कारवान समाज गढ़ना है।
जब समाज सहयोग की भावना से काम करेगा, तभी पर्यावरण, संस्कृति और विकास का संतुलन संभव होगा।”
🔹 संगठन मंत्र में गूंजा सहकार गीत
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषि शुक्ला ने किया, जबकि वातावरण को उत्साह और प्रेरणा से भर दिया सहकार गीत ने, जिसे प्रदेश प्रचार प्रमुख राहुल गुप्ता ने प्रस्तुत किया।
गीत ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और संगठन के प्रति समर्पण का भाव जगाया।
इसी के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।
🔹 संगठन समिति सत्र — नई कार्ययोजना, नए संकल्प
बैठक के दूसरे दिन संगठन समिति सत्र में आने वाले पांच माह की रणनीति और कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
सत्र में राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र गौतम और प्रदेश महामंत्री राकेश चौहान की उपस्थिति में संगठन की आगामी गतिविधियों का खाका प्रस्तुत किया गया।
दोनों अतिथियों ने संयुक्त रूप से बताया कि आने वाले समय में सहकार भारती द्वारा —
राष्ट्रीय पदाधिकारियों के जिलों में प्रवास,
पैक्स सम्मेलन,
तथा जिला अभ्यास वर्ग जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए विभाग से लेकर जिला स्तर तक एक जंबो कार्यकारिणी का गठन किया गया है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र के टोली प्रमुख और पालक अधिकारी को संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि सहकार भारती का नेटवर्क हर गांव और जिले तक सशक्त रूप से पहुंच सके।
🔹 “अनुशासन ही संगठन की आत्मा”
बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रदेश संगठन मंत्री राधेश्याम जलछत्री ने कहा कि सहकार भारती की सबसे बड़ी शक्ति उसके संस्कारवान और अनुशासित कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने कहा —
“कार्यकर्ता निर्माण ही संगठन की असली साधना है।
यदि कार्यकर्ता समर्पित और अनुशासित रहेंगे तो संगठन की जड़ें कभी कमजोर नहीं होंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में सहकार भारती की हर गतिविधि में पारदर्शिता, टीम वर्क और सामाजिक उत्थान की भावना सर्वोपरि रखी जाएगी।
🔹 वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति बनी विशेषता
दो दिवसीय बैठक में सहकार भारती के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई, जिनमें प्रमुख रूप से —
राष्ट्रीय सह प्रमुख (एफ.पी. प्रकोष्ठ) शिवनारायण पाटीदार
प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप नीखरा, सचिन ताम्रकार, ऋषि शुक्ला
प्रदेश मंत्री स्वदेश शर्मा
महिला प्रकोष्ठ प्रमुख श्रीमती शीला हनुमंत
विधि प्रकोष्ठ प्रदेश प्रमुख नरेंद्र व्यास
प्रदेश संपर्क प्रमुख प्रशांत ठाकरे
प्रदेश प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रमुख गोविंद मुकादम
सिवनी विभाग प्रमुख ए.पी. तिवारी
सुनील त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
🔹 सूचना एवं समापन
बैठक से संबंधित जानकारी प्रदेश प्रमुख, प्रचार विभाग राहुल गुप्ता ने दी।
उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय आयोजन ने संगठन की भावनात्मक एकता और सहकारिता के विस्तार को नई दिशा दी है।
सहकार से संस्कार, संस्कार से उद्धार
सहकार भारती की दो दिवसीय बैठक केवल संगठन का औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह सहकारिता की भारतीय परंपरा को नए युग में पुनर्जीवित करने का प्रयास था।
बैठक का संदेश स्पष्ट था —
“सहकारिता केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है




