रीवा में ‘ऑपरेशन प्रहार 02’ की बड़ी सफलता — पुलिस के हत्थे चढ़ा नशा कारोबारी
एक कुंटल गांजा और सैकड़ों नशीली कफ सिरप बरामद, कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये — आरोपी इलाहाबाद का निवासी
मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन प्रहार 02” के तहत रीवा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नशे के एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने जिले में सक्रिय नशा नेटवर्क की परतें उधेड़ दी हैं। चोरहटा थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने एक कुंटल गांजा, सैकड़ों नशीली कफ सिरप की बोतलें और एक अल्टो कार जब्त की है। बरामद माल की कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये बताई जा रही है।
🚔 सूचना मिली, तुरंत हुई कार्रवाई
शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे चोरहटा थाना प्रभारी आशीष मिश्रा को सूचना प्राप्त हुई कि खैरी गांव के समीप एक संदिग्ध अल्टो कार लंबे समय से खड़ी हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर रवाना हुई।
जैसे ही पुलिस ने गाड़ी के पास पहुंचकर जांच शुरू की, चालक ने वाहन को तेजी से भगाने का प्रयास किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चालक को घेराबंदी कर पकड़ लिया।
🚨 एक कुंटल गांजा और नशीली कफ सिरप बरामद
गाड़ी की तलाशी के दौरान पुलिस को एक कुंटल गांजा (लगभग 100 किलो) और 500 से अधिक नशीली कफ सिरप की शीशियाँ बरामद हुईं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार,
पकड़ा गया गांजा करीब 24 लाख रुपये का है,
जबकि नशीली कफ सिरप की कीमत लगभग 5 लाख रुपये बताई जा रही है।
इसके साथ ही जब्त की गई अल्टो कार की कीमत भी 5 लाख रुपये आंकी गई है।
कुल मिलाकर यह नशे का जखीरा करीब 30 लाख रुपये से अधिक का है, जो रीवा में नशे के फैलते जाल की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
👮♂️ इलाहाबाद निवासी आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने पकड़े गए आरोपी की पहचान राजेश कुमार मिश्रा पुत्र सिया शंकर मिश्रा, निवासी कोराव, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में की है। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह इलाहाबाद से रीवा नशीली कफ सिरप और गांजा बेचने के इरादे से आया था।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
⚖️ ऑपरेशन प्रहार के परिणाम, लेकिन कार्रवाई पर उठे सवाल
रीवा पुलिस की यह कार्रवाई नशे के खिलाफ सख्त रुख का उदाहरण है। हालांकि जानकारों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी दिसंबर माह से पहले नशा माफिया पर की गई यह कार्रवाई केवल “सालाना प्रदर्शन” साबित न हो जाए।
सूत्रों के अनुसार, जब वर्ष समाप्ति के करीब आता है, तब पुलिस विभाग राज्य शासन को वार्षिक रिपोर्ट में नशा-रोधी कार्यवाहियों के आंकड़े प्रस्तुत करता है, इसलिए नवंबर-दिसंबर में अचानक “ऑपरेशन प्रहार” जैसे अभियान तेज कर दिए जाते हैं।
वहीं, आम जनता का सवाल है कि आठ से दस महीने तक पुलिस की नींद क्यों टूटती नहीं, जबकि नशा तस्कर पूरे वर्ष सक्रिय रहते हैं।
❓ नशे का जखीरा आखिर आया कहां से?
इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और नशीली कफ सिरप रीवा तक कैसे पहुंची — यह सबसे बड़ा सवाल है।
क्या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है?
क्या स्थानीय स्तर पर कुछ लोग संरक्षक या सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं?
अब तक हर बार की तरह पुलिस नशे का माल तो पकड़ लेती है, लेकिन यह कभी स्पष्ट नहीं कर पाती कि नशे का स्रोत कौन है और कौन लोग इन कारोबारियों को संरक्षण देते हैं।
इस बार जनता चाहती है कि पुलिस सिर्फ बरामदगी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा करे ताकि रीवा की नई पीढ़ी को इस जहर से बचाया जा सके।

