गढ़ की सड़क बनी दलदल, प्रशासन बना तमाशबीन — विधायक के पत्र के बाद भी जिम्मेदारों की चुप्पी से भड़की जनता
गढ़ क्षेत्र का नाम सुनते ही कभी यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की पहचान से जाना जाता था, लेकिन आज यही सड़क गड्ढों, गंदगी और सरकारी बेरुख़ी का प्रतीक बन चुकी है।
मनगवां विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने कई बार आवाज़ उठाई, 30 अक्टूबर को रीवा कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्माण कार्य की मांग की, लेकिन प्रशासन और विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
🚧 “मरम्मत” के नाम पर जनता से मज़ाक — गड्ढों में डाली गिट्टी बनी दलदल
विभाग ने जनता के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया। गड्ढों में पानी भरा था, फिर भी बालू मिक्स गिट्टी डाल दी गई। नतीजा — अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल बन गई है। हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना जोखिम भरा, और वाहनों के पहिए दलदल में धंस रहे हैं।
ग्रामीणों ने कटाक्ष करते हुए कहा — “यह सड़क नहीं, प्रशासन की नाकामी का पोस्टर है।”
⚠️ विधायक के प्रयासों को जानबूझकर नाकाम कर रहा विभाग
विधायक नरेंद्र प्रजापति ने जनता की आवाज़ बनकर कई बार सड़क निर्माण के लिए पत्राचार और बयान दिए। लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी मानो इन प्रयासों को नाकाम करने की साजिश में जुटे हैं।
विधायक के आदेशों को फाइलों में दबा दिया गया, और जनता को केवल दिखावटी मरम्मत के नाम पर छल किया गया। यह स्थिति न केवल विभागीय लापरवाही बल्कि जनप्रतिनिधि के अपमान का भी उदाहरण है।
🏗️ “कार्य प्रगति पर है” — ये है प्रशासन का नया मज़ाक
ग्रामीणों ने जब सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज कीं, तो विभाग ने बेशर्मी से जवाब दिया — “कार्य प्रगति पर है, शिकायत बंद की जाए।”
जनता पूछ रही है — कौन-सी प्रगति? क्या गड्ढों में पानी और गिट्टी भरना प्रगति है?
असलियत यह है कि न तो ठेकेदार साइट पर पहुंचे, न कोई निर्माण मशीनरी दिखाई दी। सब कुछ “कागज़ी प्रगति” बनकर रह गया।
📰 मीडिया की खबरें बनीं दस्तावेज, लेकिन प्रशासन बना मौन दर्शक
पिछले कई हफ्तों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया लगातार गढ़ मार्ग की दुर्दशा उजागर कर रही है। तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
फिर भी, रीवा जिले का प्रशासन मौन है — न किसी अधिकारी का निरीक्षण, न किसी ठेकेदार पर कार्रवाई। सवाल उठता है — क्या प्रशासन जनता की तकलीफ देखने के लिए अंधा हो गया है, या जानबूझकर चुप है?
🗣️ जनता का फटकार भरा सवाल — “जनता वोट दे तो याद, अब हमारी सड़कों पर नजर क्यों नहीं?”
गढ़ के ग्रामीण अब खुलकर बोल रहे हैं —
“वोट के वक्त हर नेता हमारे दरवाजे तक आता है, लेकिन जब सड़क दलदल में डूबती है, तब कोई नहीं आता।”
जनता का आरोप है कि विधायक के प्रयासों को अफसरों ने जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया ताकि “कार्य प्रगति पर” का झूठा दावा दिखाया जा सके।
अब जनता सीधा सवाल पूछ रही है —
“क्या विकास सिर्फ पोस्टरों, भाषणों और फाइलों तक सीमित है? जमीनी हकीकत कौन देखेगा?”
🔥 प्रशासन जवाब दे — जनता को कब मिलेगा न्याय?
गढ़ क्षेत्र की सड़क की स्थिति अब सिर्फ विकास का सवाल नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और प्रशासन की जवाबदेही का मामला बन चुकी है।
सड़क पर दलदल में धंसी बाइकें, फंसे ट्रैक्टर और पैदल चलते लोग रोज़ाना की तस्वीर बन चुकी हैं।
जनता कह रही है —
“हमें वादे नहीं, सड़क चाहिए। बयान नहीं, समाधान चाहिए।”
📢 अब जनता की एक ही मांग — तत्काल सड़क निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
गढ़ की जनता अब खामोश नहीं है। लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।


