📰 ई-अटेंडेंस पर शिक्षा विभाग का अजब-गजब एक्शन
मऊगंज में स्वर्गवासी शिक्षकों को नोटिस, पूछा—“स्कूल क्यों नहीं आ रहे?”
मध्यप्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। विभाग ने जिले के 1568 शिक्षकों को हमारे शिक्षक एप पर ऑनलाइन हाजिरी नियमित रूप से दर्ज न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। हैरानी की बात यह है कि इस सूची में दो ऐसे शिक्षकों के नाम भी शामिल हैं, जिनका निधन 1–2 वर्ष पूर्व हो चुका है।
✔ कलेक्टर से अनुमोदित नोटिस, मृतकों के नाम भी शामिल
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रीवा/मऊगंज द्वारा 12 नवंबर को जारी की गई इस सूची में शिक्षकों के नाम, पद, स्कूल और यूनिक आईडी शामिल हैं। अधिकारियों ने शिक्षकों से पूछा है कि निर्देशों के बावजूद उन्होंने ई-अटेंडेंस एप पर अपनी उपस्थिति नियमित रूप से क्यों दर्ज नहीं की।
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अनुपस्थित दिवसों का वेतन रोका जा सकता है।
इसी सूची में हायर सेकेंडरी स्कूल खर्रा के दिवंगत प्रधानाध्यापक देवतादीन कोल (AX1226) का नाम भी शामिल है, जिनका मृत्यु प्रमाण-पत्र 19 मई 2023 को नगर पंचायत त्योंथर द्वारा जारी किया गया था। इसी प्रकार प्राथमिक शिक्षक रामगरीब दीपांकर (AW8635) को भी नोटिस जारी हुआ है, जबकि जानकारी के अनुसार उनका निधन लगभग 6 माह पूर्व हो चुका है।
✔ मृत शिक्षकों को नोटिस, लिखा—“17 दिन की उपस्थिति शून्य”
जारी नोटिस में लिखा गया है कि अक्टूबर माह में 17 कार्य दिवस होने के बावजूद शिक्षक ने 0 दिन लॉग-इन और 0 दिन लॉग-आउट किया है, जिससे प्रतीत होता है कि वह या तो स्कूल नहीं आए या देर से आए व जल्दी चले गए। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1995 का उल्लंघन बताते हुए कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
सवाल यह उठ रहा है कि स्वर्गवासी शिक्षक कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण कैसे देंगे?
✔ कई जीवित शिक्षकों के पदस्थापन में भी त्रुटि
सूत्र बताते हैं कि इस नोटिस में कई ऐसे शिक्षकों के नाम भी गलत दर्शाए गए हैं, जिनकी वास्तविक पदस्थापना अन्य स्थानों पर है। विभाग ने गलत रिकॉर्ड से नोटिस जारी कर कलेक्टर से भी इसे अनुमोदित करा लिया।
📌 विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर
यह घटना शिक्षा विभाग के डेटा-प्रबंधन की जर्जर स्थिति को उजागर करती है—
- मृत शिक्षकों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं।
- पोर्टल पर खराब डेटा सत्यापन।
- गलत पदस्थापन विवरण।
- बिना जाँच के कलेक्टर से अनुमोदन।
गंभीर सवाल यह है कि जिस विभाग के रिकॉर्ड में मृत्यु तक की जानकारी अद्यतन नहीं है, वह शिक्षकों पर ऐप आधारित अनुशासन लागू करने का दबाव कैसे डाल रहा है?
📌 ई-अटेंडेंस मामला हाईकोर्ट में भी लंबित
"हमारे शिक्षक" ऐप की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
यह प्रकरण वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अब तक 5 सुनवाई हो चुकी हैं। अगली सुनवाई 24 नवंबर 2025 को निर्धारित है।
ऐसे में यह भी चर्चा का विषय है कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तब विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर नोटिस जारी करना कितना उचित है।
📌 एप की विश्वसनीयता संदिग्ध
यदि हमारे शिक्षक ऐप सही तरीके से कार्य करता, तो मृत्यु के बाद भी उपस्थिति न लगाने का आरोप लगाकर नोटिस जारी होने जैसी स्थिति न आती। ऐप की रिपोर्ट पर आँख मूँदकर कार्रवाई करना स्वयं विभाग की गंभीर कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करता है।
जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा से इस मामले में कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
📌 इन्होंने कहा
हिछ लाल वर्मा, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, नईगढ़ी
“संकुल केंद्र खर्रा में पदस्थ रहे प्रधानाध्यापक देवतादीन कोल और प्राथमिक शिक्षक रामगरीब दीपांकर का स्वर्गवास हो चुका है। ई-अटेंडेंस से संबंधित नोटिस पोर्टल की त्रुटि के कारण गलत जारी हो गई है।






