रीवा जिले में पोषण आहार घोटाले का खुलासा पंजीरी के पैकेट में मिला कंकड़–बालू, पैकिंग तिथि भी गायब
विश्व बैंक प्रायोजित योजना की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
रीवा जिले के गंगेव विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। विश्व बैंक द्वारा समर्थित पोषण आहार योजना, जिसका उद्देश्य छह माह से तीन वर्ष तक के कुपोषित बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पौष्टिक सामग्री उपलब्ध कराना है, उसी योजना के अंतर्गत वितरित पंजीरी के एक पैकेट में कंकड़ और बालू पाए गए।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पैकेट पर पैकिंग तिथि दर्ज ही नहीं थी, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और उत्पादन व वितरण प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाता है। यह मामला विभागीय उदासीनता की ओर संकेत करता है, जिससे यह समझ आता है कि न तो उत्पादन चरण में गुणवत्ता जांच हुई और न ही भंडारण व परिवहन में मानकों का पालन किया गया।
हर मंगलवार वितरण का नियम, पर गुणवत्ता नियंत्रण गायब
महिला एवं बाल विकास विभाग की गाइडलाइन के अनुसार पोषण आहार का वितरण हर मंगलवार किया जाता है। पर जिस पैकेट में मिलावट पाई गई, उसकी स्थिति यह दर्शाती है कि—
उत्पादन स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया गया,
पैकेजिंग प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई,
या भंडारण/परिवहन के दौरान भारी लापरवाही बरती गई।
रीवा जिला पहले से ही मिलावटखोरी के मामलों को लेकर संवेदनशील रहा है। “विंध्य वसुंधरा समाचार” द्वारा पूर्व में भी खाद्य विभाग की लापरवाही और अव्यवस्थाओं को उजागर किया जाता रहा है। लेकिन अब महिला एवं बाल विकास विभाग की इस संवेदनशील योजना में ऐसी अनियमितता का सामने आना बेहद चिंताजनक है।
विश्व बैंक प्रायोजित योजना पर दाग — जिम्मेदारी से कौन भागेगा?
विश्व बैंक समर्थित इस पोषण आहार परियोजना में कठोर गुणवत्ता मानक अनिवार्य होते हैं। प्रत्येक बैच की जांच के बाद ही वितरण की अनुमति दी जाती है। परंतु संदिग्ध पैकेट में
न पैकिंग तिथि,
न बैच नंबर,
और न ही गुणवत्ता से संबंधित कोई भी जानकारी मौजूद थी।
यह साफ संकेत है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर गड़बड़ी है—चाहे वह उत्पादन संयंत्र हो, परिवहन एजेंसी हो या विभागीय निरीक्षण व्यवस्था।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मिलावट उत्पादन स्तर पर हुई या वितरण तंत्र के दौरान, लेकिन प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर विभागीय लापरवाही का प्रतीत होता है।
अब जांच पर टिकी निगाहें — क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई?
घटना की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आ चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
संभागीय आयुक्त,
जिला कलेक्टर,
एवं महिला एवं बाल विकास विभाग
इस प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या दोषियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
बच्चों का स्वास्थ्य दांव पर — जवाबदेही तय करना अनिवार्य
पोषण आहार सीधे तौर पर बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। ऐसी मिलावट न केवल घोर लापरवाही है, बल्कि योजनाओं की पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न भी है।
यदि इस मामले में तुरंत उच्च-स्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह पूरे जिले के पोषण आहार वितरण की विश्वसनीयता को संदेह के घेरे में खड़ा कर देगा।




