मऊगंज में इलाज बना मौत का सफर — सुई लगने के एक घंटे बाद बुजुर्ग की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप
निजी क्लीनिक में इलाज कराने पहुंचे बुजुर्ग की संदिग्ध हालात में मौत, आक्रोशित परिजनों ने थाने पहुँचकर की न्याय की मांग
पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव, नगर में चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल
मऊगंज नगर में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। इलाज कराने गए एक बुजुर्ग की सुई लगने के कुछ ही देर बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए थाने में हंगामा किया। घटना के बाद नगर में निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली और चिकित्सा लापरवाही को लेकर आक्रोश फैल गया है।
घटना घुरेहटा वार्ड क्रमांक 13 की बताई जा रही है, जहाँ रहने वाले 60 वर्षीय मोतीलाल प्रजापति पिछले दो से तीन दिनों से बुखार और सीने में जलन की समस्या से पीड़ित थे। मंगलवार दोपहर वे अपने परिजनों के साथ संजीवनी पाली क्लीनिक, मऊगंज पहुँचे। वहाँ पर मौजूद चिकित्सक डॉ. एच.एन. सिंह ने जांच के बाद दवा और एक इंजेक्शन लिखकर लगाया।
परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के करीब आधे घंटे बाद ही मोतीलाल की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनके शरीर में झटके आने लगे और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। घबराए परिजन उन्हें तत्काल घर ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही बुजुर्ग बेहोश होकर गिर पड़े।
परिजनों ने तत्काल उन्हें आशीर्वाद अस्पताल मऊगंज में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। गुस्से में परिवारजन शव लेकर सीधे मऊगंज थाने पहुँच गए और डॉक्टर पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में एसआई संतोष सिंह चौहान ने परिजनों से बात की और स्थिति को शांत किया। उन्होंने बताया —
“मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
पोस्टमार्टम के लिए शव को मऊगंज सिविल अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि मौत इंजेक्शन के रिएक्शन से हुई या किसी अन्य कारण से।
इस बीच नगर में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि मऊगंज और आसपास के क्षेत्रों में कई निजी क्लीनिक बिना पर्याप्त सुविधाओं और योग्य चिकित्सा स्टाफ के संचालित हो रहे हैं। ऐसे केंद्रों पर बिना जांच या चिकित्सीय सलाह के दवाएँ और इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में संचालित सभी निजी क्लीनिकों की जांच कराई जाए, और जिन संस्थानों में अनियमितताएँ पाई जाएँ, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।
नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस घटना को “स्पष्ट चिकित्सा लापरवाही” बताया है और कहा कि यदि प्रशासन सख्ती नहीं बरतेगा, तो लोग ऐसे हादसों का शिकार होते रहेंगे।

