गढ़ पंचायत में अधूरे निर्माणों का बोलबाला — लापरवाही से बढ़ रहा जोखिम, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
रीवा। जनपद पंचायत गंगेव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गढ़ में निर्माण कार्यों में हो रही लगातार अनियमितताएँ ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पैदा कर रही हैं। ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच गोविंद कचेर एवं सचिव शिवेंद्र तिवारी के प्रबंधन में चल रहे करोड़ों रुपये के विकास कार्यों पर ग्रामीणों ने अब खुलकर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। अधूरे प्रोजेक्ट, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कार्यस्थलों पर फैली अव्यवस्था किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
अधूरे निर्माण—गांव को बना रहे जोखिम क्षेत्र
ग्राम पंचायत के कई स्थानों पर सड़क, नाली, पुलिया एवं भवन निर्माण कार्य शुरू तो किए गए, लेकिन बिना सुरक्षा बैरिकेड्स, चेतावनी पट्टिकाओं और सुरक्षा डंडों के अधूरे छोड़ दिए गए हैं। रात के समय इन स्थानों पर दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि बार-बार शिकायतों के बावजूद मौन हैं।
गुणवत्ता और मापदंडों की खुली अनदेखी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई निर्माण प्रकरण मापदंडों के विपरीत चल रहे हैं। गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी लगभग न के बराबर है। नालियों की ऊंचाई-नीचाई, सड़क निर्माण की मोटाई, पुल-पुलिया की मजबूती—सब पर सवालिया निशान हैं।
पिछले 40 वर्षों में सड़क, नाली, पुल और भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गढ़ गांव में स्थायी विकास दिखाई नहीं देता। पहले बने कई भवन अब खंडहर का रूप ले चुके हैं, जबकि कई निर्माण कार्य वर्षों बाद भी पूरे नहीं हो पाए।
बाजार क्षेत्र की नाली बनी असुविधा का पर्याय
ग्राम के मुख्य बाजार में बनाई जा रही नाली लोगों को राहत देने के बजाय भारी परेशानी का सबब बन गई है। नाली की गलत ढलान, अधूरे हिस्से और सड़क पर फैला कीचड़ कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन चुका है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएँ रोजाना जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों की पीड़ा— लेकिन “सेवा निश्चित” होने का दबाव
ग्रामीणों का कहना है कि “जो भी इस काम से जुड़ा है, उसकी सेवा खतरे में पड़ सकती है, इसलिए कोई भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता।” प्रशासनिक डर और राजनीतिक दबाव के कारण शिकायतें दबाई जा रही हैं, जबकि गढ़ के लोग वास्तविक विकास से वंचित हैं।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत गंगेव और विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि—
1. अधूरे निर्माण कार्यों की तत्काल जांच कराई जाए।
2. सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सरपंच गोविंद कचेर व सचिव शिवेंद्र तिवारी से स्पष्टीकरण लिया जाए।
3. जिन कार्यों में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार पाया जाए, उन पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
4. सभी अधूरे निर्माण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुसार जल्द पूर्ण कराया जाए।
5. ग्राम में स्वतंत्र तकनीकी जांच दल भेज कर प्रत्येक प्रोजेक्ट का पुनः मूल्यांकन कराया जाए।
अधिकारियों की चुप्पी बनी सवाल
ग्रामवासी पूछ रहे हैं—
“जब सरकार भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का दावा करती है, तो ग्राम पंचायत स्तर पर अनियमितताएं आखिर किसकी शह पर हो रही हैं? क्या ग्रामीणों की सुरक्षा और जनसुविधा की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों में ही सीमित है?”
ग्राम पंचायत गढ़ के विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति अब शासन की तत्परता की कसौटी पर है — देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर ग्रामीणों को जोखिम भरे हालात में जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा।




