नीम चौराहा स्वास्थ्य शिविर में पहुँची 291 ज़िंदगियों तक उम्मीद परंतु जमीनी स्तर पर ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की बदहाल हकीकत भी आई सामने
रीवा मऊगंज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोदाबाग द्वारा नीम चौराहा परिसर में आयोजित विशाल निःशुल्क आउटरिच स्वास्थ्य शिविर ने एक बार फिर यह साबित किया कि जब चिकित्सकीय तंत्र सक्रिय होकर जनता के बीच उतरता है, तो स्वास्थ्य केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की मजबूत ढाल बन जाता है।
इस शिविर में गर्भवती महिलाओं की जांच, गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग, टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत परीक्षण, आयुष्मान कार्ड वितरण, तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना के तहत पैथोलॉजी सेवाएँ प्रदान की गईं। कुल 291 मरीजों ने विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया, जो इस प्रयास की सफलता और जनविश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।
शिविर को सफल बनाने में जिला स्वास्थ्य अधिकारी-2 डॉ. के.बी. गौतम, वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक राघवेंद्र मिश्रा, पब्लिक हेल्थ मैनेजर सौरव पाण्डेय, एवं पूरी चिकित्सकीय टीम की संगठित और संवेदनशील कार्यशैली का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अभियान का उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि जन-जागरूकता, समय पर निदान और स्वास्थ्य-अधिकारों की सामाजिक पहुँच बढ़ाना है, जो एक समर्थ समाज की नींव रखता है।
आज 09 दिसंबर को यह अभियान आगे बढ़ेगा। अगला स्वास्थ्य शिविर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतहरा के अंतर्गत रतहरा तालाब पार्किंग स्थल में आयोजित होगा, जहाँ नागरिकों को पुनः व्यापक चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। यह पहल शासन की स्वास्थ्य दृष्टि को मजबूती देती है और यह संदेश दोहराती है कि—
“स्वास्थ्य वहीं है, जहाँ व्यवस्था और संवेदना साथ खड़ी हों।”
परंतु इसी स्वास्थ्य तंत्र के समानांतर खड़ी है एक कड़वी सच्चाई— गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था आज भी अवैध चिकित्सकों के भरोसे
जहाँ एक ओर शहरों में स्वास्थ्य विभाग की पहलें सराहनीय परिणाम दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर रीवा–मऊगंज जिले के ग्रामीण अंचलों की वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। अधिकांश गांवों में आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था बड़े पैमाने पर अवैध चिकित्सकों, बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर्स और मोटरसाइकिल पर घूम-घूमकर दवा करने वाले झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे चल रही है।
पूर्व में पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन द्वारा हर थाना क्षेत्र में ऐसे क्लिनिक और चिकित्सकों की जानकारी एकत्रित की गई थी। उस समय सैकड़ों अवैध चिकित्सक चिन्हित हुए थे, पर आज इनकी संख्या कई हजारों में पहुँच चुकी है। आकर्षक बोर्ड, बड़े-बड़े नाम और “डेंटल डॉक्टर” या “चिकित्सक” के नाम से चल रहे कई केंद्र बिना किसी चिकित्सा पंजीयन के खुलेआम संचालित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन समय-समय पर इन पर कार्रवाई की घोषणा करता है, कुछ केंद्रों पर औपचारिक छापे भी पड़ते हैं, किंतु कुछ दिनों बाद स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। अवैध चिकित्सा से जुड़े कई लोग प्रभावशाली तत्वों के संपर्क में रहते हैं, जिसके कारण अधिकारियों के लिए लगातार कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
यदि आज किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या ब्लॉक स्तर पर यह पूछा जाए कि—
"कितने अवैध क्लिनिक संचालित हो रहे हैं?" तो संभवतः किसी भी विभाग के पास सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं होगी।
सकारात्मक पहल और वास्तविक चुनौतियों के बीच खड़ा है रीवा–मऊगंज का स्वास्थ्य तंत्र
एक ओर योजनाबद्ध स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से सरकार लोगों तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास कर रही है—
वहीं दूसरी ओर ग्रामीण समाज का बड़ा हिस्सा अब भी अनियमित, असुरक्षित और अवैध स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर है।
स्वास्थ्य विभाग की पहलें तभी प्रभावी होंगी, जब—
अवैध चिकित्सा पर वास्तविक, निरंतर और कठोर कार्रवाई हो,
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता बढ़े,
पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या को गाँवों में बढ़ाने हेतु ठोस नीति बने,
और स्वास्थ्य सुविधाएँ केवल शिविरों तक सीमित न रहकर नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएँ।
