रीवा जिले की आंगनवाड़ी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, पोषण कार्यक्रम प्रभावित
रीवा जिले की जनपद पंचायत गंगेव ग्राम पंचायत गढ़ लौरी खुर्द बाबूपुर क्षेत्र सहित आसपास की पंचायतों में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और नियम उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि कई केंद्र ऐसे व्यक्तियों के नाम अनुबंधित हैं, जिन्हें शासन के नियमानुसार केंद्र संचालन की अनुमति नहीं है।
सुनीता संघ, बाबूपुर — दो केंद्रों का संचालन, पोषण वितरण अधूरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनीता संघ, बाबूपुर स्वयं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी बेटी गोल्डी विश्वकर्मा रसोईया के रूप में कार्य कर रही है। इनके समूह के नाम पर ढाढर और सिरैया दो केंद्र अनुबंधित हैं।
ढाढर केंद्र में नाश्ता पूर्णतः निरंक बताया गया है। बच्चों को केवल दाल-चावल और खिचड़ी ही दी जा रही है, जबकि मेन्यू में विविधता अनिवार्य है।
सिरैया केंद्र में भी नाश्ता व भोजन दोनों निरंक होने की शिकायतें हैं, जिससे पोषण स्तर प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ये केंद्र कागजों में तो संचालित दिखते हैं, लेकिन वास्तविकता में पोषाहार वितरण की स्थिति अत्यंत खराब है।
ममता संघ , सिगटी टोला—पारिवारिक हस्तक्षेप से नियमों का उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार ममता संघ, सिगटी टोला के नाम पर बाबूपुर और बेलहाई आंगनवाड़ी केंद्र अनुबंधित हैं। इन केंद्रों में—
नाश्ते की व्यवस्था निरंक पाई गई
बच्चों को केवल दाल-चावल और खिचड़ी परोसने की शिकायतें
केंद्रों के संचालन में परिवार के कई सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़े
सास व मां रसोईया के रूप में
बहू सचिव के पद पर कार्यरत
शासन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन
आंगनवाड़ी संचालन संबंधी शासन निर्देशों के अनुसार—
पंचायत प्रतिनिधि, कार्यकर्ता, सहायिका या उनके निकट संबंधी स्वयं सहायता समूह चलाने अथवा आंगनवाड़ी केंद्र अनुबंधित करने के पात्र नहीं हैं।
लेकिन बाबूपुर व आसपास के केंद्रों में कार्यकर्ताओं और उनके परिवारजन ही समूह संचालित कर रहे हैं, जिससे लाभ का टकराव पैदा होता है।
ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने इन अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि पोषण आहार योजना का वास्तविक लाभ बच्चों व माताओं तक पहुंच सके।

