रीवा : गढ़ थाना अंतर्गत लालगांव चौकी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
रीवा जिले का पुलिस विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर तीखी जनचर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है। गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत लालगांव चौकी से जुड़े दो अलग-अलग लेकिन गंभीर प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें पुलिस पर अवैध वसूली और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन मामलों ने न केवल खाकी की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी झकझोर कर रख दिया है।
पहला मामला: ठगी के सोने में ‘सेवा शुल्क’ का खेल
जानकारी के अनुसार यह मामला नवंबर 2025 का है। आरोप है कि एक शातिर युवक ने एक युवती के परिवार से योजनाबद्ध तरीके से दर्जनों तोला सोना ठग लिया और उसे बाजार में बेच दिया। जब पीड़ित परिवार को ठगी का पता चला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन इसके बाद कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
सूत्रों एवं स्थानीय व्यापारियों के बीच चर्चाओं के मुताबिक, जिन स्वर्णकारों ने वह सोना खरीदा था, उन्हें गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी दी गई। आरोप है कि लालगांव चौकी एवं गढ़ थाने से जुड़े कुछ चर्चित पुलिसकर्मियों—जिसमें एक प्रधान आरक्षक की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है—ने व्यापारियों से लाखों रुपये का तथाकथित ‘सेवा शुल्क’ वसूला।
चर्चा है कि जिन्होंने मनचाही रकम अदा कर दी, उन्हें कार्रवाई से राहत मिल गई, जबकि भुगतान न करने वालों को आरोपी बना दिया गया।
दूसरा मामला: भैंस ले जाने पर ₹13 हजार की कथित वसूली
दूसरा मामला जनवरी 2026 का बताया जा रहा है। आरोप है कि एक गरीब व्यक्ति जब अपनी भैंस लेकर कहीं जा रहा था, तब पुलिसकर्मियों ने उसे रोककर डराया-धमकाया और उससे ₹13,000 की अवैध वसूली कर ली। यह घटना सामने आते ही क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रीवा रेंज के आईजी द्वारा जिन पुलिसकर्मियों को पूर्व में विवादित एवं शिकायतों के आधार पर चिन्हित किया गया था, उन्हें सुधारात्मक कार्रवाई के बजाय महत्वपूर्ण थानों में पदस्थ कर दिया गया, जबकि ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया। यह स्थिति पुलिस महकमे के भीतर भी असंतोष का कारण बन रही है।
प्रशासन और सत्ताधारी दल के लिए चेतावनी
जनता में व्याप्त यह असंतोष आने वाले समय में सत्ताधारी दल के लिए भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसी स्थिति बन सकती है।
लोगों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के आरोप पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास की खाई को और गहरा कर रहे हैं।
अधिकारियों का मौन, जांच की मांग
इस पूरे मामले में जब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि समाचार पत्र इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता, लेकिन जिस तरह से लगातार शिकायतें और जनचर्चा सामने आ रही हैं, उसने गोपनीय जांच एवं निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेकर पारदर्शी जांच कराता है और क्या दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

