रीवा। अष्टम अपर सत्र न्यायालय रीवा ने बहुचर्चित सनसनीखेज हत्या प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया है। न्यायालय के श्रीमान अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष विचाराधीन सत्र प्रकरण क्रमांक 156/2020, शासन बनाम अंकित तिवारी व अन्य में 28 फरवरी 2026 को निर्णय पारित किया गया।
न्यायालय ने आरोपी अंकित तिवारी एवं कृष्णानंद दुबे, दोनों निवासी ग्राम पुराष थाना रायपुर करचुलियान, जिला रीवा, को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
घटना का विवरण
मामले के अनुसार मृतक विवेक चंद्र पाठक के भाई दीपचंद्र पाठक ने 12 फरवरी 2020 को थाना रायपुर करचुलियान में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि 11 फरवरी 2020 की रात्रि लगभग 7 से 8 बजे के बीच मृतक शैलेन्द्र तिवारी के कियोस्क सेंटर, महसांव में बैठा था। इसी दौरान अंकित तिवारी के कई कॉल मृतक के मोबाइल पर आए।
बताया गया कि मृतक को पम्प हाउस में बीड़ी-माचिस पहुंचाने के लिए बुलाया गया था। रात्रि 9:30 बजे मृतक ने अपनी पत्नी को फोन पर बताया कि वह अंकित तिवारी के पम्प हाउस में बैठा है और आधे घंटे में लौट आएगा। इसके बाद रात्रि 1 बजे मोबाइल बंद मिला।
अगली सुबह मृतक के परिजन एवं शैलेन्द्र तिवारी जब पम्प हाउस पहुंचे तो मृतक का शव बाहर पड़ा मिला। घटनास्थल पर खून बिखरा हुआ था तथा मृतक के हाथ-पैर बंधे पाए गए। आरोप था कि पुरानी रंजिश के चलते राड, लाठी और पत्थर से मारपीट कर हत्या की गई। मृतक के पैर और एक हाथ में फ्रैक्चर तथा सिर में गंभीर चोटें पाई गई थीं।
पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना पत्थर एवं अन्य सामग्री जब्त की थी। मृतक के जूते कुएं में फेंके जाने और मोबाइल तोड़े जाने का भी आरोप था। थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 56/2020 अंतर्गत धारा 302, 201, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच एवं न्यायालयीन प्रक्रिया
घटना के अगले दिन मुख्य आरोपी अंकित तिवारी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने उसके मेमोरेंडम कथन के आधार पर मृतक का टूटा मोबाइल, कथित डंडा तथा खून से सना शर्ट-पैंट जब्त किए थे। बाद में कृष्णानंद दुबे को सह-आरोपी बनाया गया, किंतु उसके पास से कोई जब्ती नहीं हुई।
मामले में मोबाइल सीडीआर, लोकेशन एवं 100 नंबर पर रात 10 बजे किए गए कॉल सहित तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। विवेचना पूर्ण होने के पश्चात 6 मई 2020 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान मृतक के परिजनों सहित अन्य साक्षियों के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय ने मामले को सनसनीखेज हत्या की श्रेणी में रखते हुए विस्तृत सुनवाई की।
न्यायालय का निर्णय
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के उपरांत न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। साक्ष्यों में पर्याप्त ठोसता और निरंतरता न होने के कारण दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।
फलस्वरूप 28 फरवरी 2026 को पारित निर्णय में अंकित तिवारी एवं कृष्णानंद दुबे को दोषमुक्त घोषित कर दिया गया।

