पान मसाला–गुटखा की कालाबाजारी पर रीवा प्रशासन मौन क्यों? पुराने प्रिंट रेट पर नए दाम, उपभोक्ताओं से खुली लूट का आरोप
रीवा। जिले में पान मसाला और गुटखा की कालाबाजारी को लेकर बाजार में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, पुराने प्रिंट रेट वाले गुटखा पैकेटों को मनमाने दाम पर बेचा जा रहा है। आरोप है कि प्रति बंडल लगभग ₹100 तक की अवैध बढ़ोतरी की गई है, जबकि फुटकर बाजार में एक-एक पाउच ₹45 से ₹50 तक में बेचा जा रहा है।
सबसे अधिक चर्चा राजश्री गुटखा को लेकर है, जिसके नाम पर बड़े स्तर पर रेट बढ़ाने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि जिन पैकेटों पर पुराना अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अंकित है, उन्हें भी बढ़े हुए दाम पर बेचा जा रहा है। इससे यह संदेह गहरा रहा है कि कहीं न कहीं संगठित तरीके से कालाबाजारी का खेल चल रहा है।
करोड़ों का खेल, शासन को राजस्व हानि की आशंका
सूत्रों का दावा है कि पूरे जिले में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गुटखा और पान मसाला की बिक्री होती है। यदि प्रति बंडल ₹100 तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है, तो यह आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। इससे जहां उपभोक्ताओं की जेब पर सीधी मार पड़ रही है, वहीं शासन को भी संभावित राजस्व हानि हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है?
थोक एजेंसी से फुटकर तक ‘मनमानी’ का आरोप
फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि एजेंसी संचालक और थोक व्यापारी पहले ही बढ़े हुए दाम पर माल उपलब्ध करा रहे हैं। मजबूरी में खुदरा दुकानदार भी ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई जगह जानबूझकर मुनाफाखोरी की जा रही है।
बाजार में यह भी चर्चा है कि जिन उत्पादों की लागत में कमी आई है, उनके दाम कम नहीं किए गए, जबकि जिनकी कीमत बढ़ी है, उनमें अपेक्षा से अधिक वृद्धि कर दी गई है। इससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य और आर्थिक दोहरी मार
पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पाद जहां एक ओर गंभीर बीमारियों—विशेषकर मुंह के कैंसर—का कारण बनते हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई कीमतों के कारण उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को एक ओर जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए और दूसरी ओर अवैध मुनाफाखोरी पर सख्त नियंत्रण करना चाहिए।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
जनता और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि रीवा प्रशासन बाजार में विशेष जांच अभियान चलाए। प्रिंट रेट से अधिक वसूली करने वाले एजेंसी संचालकों, थोक व फुटकर विक्रेताओं पर कठोर कार्रवाई की जाए। नियमित निरीक्षण और कड़ी दंडात्मक कार्यवाही से ही ऐसे तत्वों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कालाबाजारी का यह खेल और बढ़ सकता है। अब देखना यह है कि रीवा प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी तोड़ता है और उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

