⚠️ काजू-बादाम से भी महंगा “राजश्री” गुटखा: ओवररेट बिक्री से जनता की जेब पर डाका, प्रशासन मौन क्यों? ⚠️
रीवा/मऊगंज। जिले के गांव-गांव, कस्बों और शहर की गलियों में इन दिनों तथाकथित “राजश्री” गुटखे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हालात यह हैं कि काजू, बादाम और चिरौंजी जैसे महंगे मेवों से भी अधिक कीमत पर गुटखा बेचा जा रहा है। आरोप है कि निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा दाम वसूलकर उपभोक्ताओं की जेब पर खुला डाका डाला जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक खामोश है।
एमआरपी 0से ज्यादा वसूली का खेल
स्थानीय लोगों के अनुसार—
₹5 का पाउच ₹8 में बेचा जा रहा है
₹20 का पाउच ₹25 में
₹40 का पाउच ₹50 में खुलेआम बिक रहा है
यह सिर्फ कुछ दुकानों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर चल रहा संगठित मुनाफाखोरी का नेटवर्क बताया जा रहा है। एजेंसी संचालक, बड़े सप्लायर और थोक विक्रेता अधिक लाभ कमाने की होड़ में हैं, जबकि खुदरा दुकानदार उपभोक्ताओं से ओवररेट वसूल कर रहे हैं।
गरीब और युवा सबसे बड़े शिकार
गांवों में मजदूर, किसान और युवा वर्ग इस लत के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। दिनभर की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा गुटखे पर खर्च हो रहा है। जो पैसा बच्चों की पढ़ाई, इलाज, घर-परिवार और खेती में लग सकता था, वही पैसा थूक की पिचकारी और बीमारी में बदल रहा है।
स्वास्थ्य पर घातक असर
चिकित्सकों के अनुसार गुटखा और तंबाकूजनित उत्पाद कैंसर, टीबी, हृदय रोग और पेट की गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण हैं। इसके बावजूद करोड़ों रुपये का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। स्वास्थ्य चेतावनी पैकेट पर छपी होने के बावजूद न तो बिक्री पर प्रभाव पड़ रहा है और न ही ओवररेट पर कोई सख्ती दिख रही है।
प्रशासन पर उठते सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एमआरपी से अधिक मूल्य पर बिक्री कानूनन अपराध है, तो संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
क्या निरीक्षण नहीं हो रहे?
क्या एजेंसियों की जांच नहीं हो रही?
या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने खाद्य एवं औषधि विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि ओवररेट बिक्री पर त्वरित छापेमारी, लाइसेंस निरस्तीकरण और जुर्माने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यह लूट बंद हो सके।
समाज के लिए चेतावनी
नशा और ओवररेट वसूली का यह गठजोड़ समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। जहर बेचने वाले ही नहीं, बल्कि चुप रहकर इसे बढ़ावा देने वाले भी बराबर जिम्मेदार हैं।
अब जागने का समय
राजश्री और अन्य गुटखा उत्पादों से दूरी बनाएं
एमआरपी से ज्यादा कीमत मांगे जाने पर विरोध दर्ज कराएं
बच्चों और युवाओं को इस लत से बचाने के लिए जागरूकता फैलाएं
प्रशासन से ठोस और निष्पक्ष कार्यवाही की मांग करें
जिंदगी की कीमत किसी भी “राजश्री” से कहीं ज्यादा है। समाज, प्रशासन और जागरूक नागरिकों को मिलकर इस खुली लूट और स्वास्थ्य के जहर के खिलाफ आवाज उठाना होगा।

