“ओबीसी छात्रावास की क्षमता 100 से बढ़ाकर 200 करने की मांग, छात्र-छात्राओं की समस्याओं पर गरजी आवाज”
रीवा।
ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं की शिक्षा, छात्रावास व्यवस्था, पेयजल संकट, छात्रवृत्ति तथा अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक सभागार में आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों ने भाग लेकर विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछड़े और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में प्रदेश के यशस्वी उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के समक्ष ओबीसी छात्रावास की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान में छात्रावास की क्षमता मात्र 100 सीटों की है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अनेक पात्र छात्र-छात्राएं छात्रावास की सुविधा से वंचित रह जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए छात्रावास की क्षमता 100 से बढ़ाकर 200 करने की मांग जोर-शोर से उठाई गई, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को रहने और पढ़ाई की सुविधा मिल सके।
बैठक में संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने छात्रावासों की जर्जर भवन स्थिति, स्वच्छ पेयजल की कमी, शौचालय व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और छात्रवृत्ति के समय पर भुगतान जैसे कई मुद्दों को गंभीरता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि यदि इन बुनियादी समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बैठक में ओबीसी महासभा मध्य प्रदेश के प्रदेश महासचिव पप्पू कनौजिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है और इसके लिए छात्रावासों की संख्या व सुविधाओं में वृद्धि अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेवियों और प्रतिनिधियों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि यदि छात्रावासों की क्षमता बढ़ेगी और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा तो दूरदराज के ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। बैठक के अंत में अधिकारियों से मांग की गई कि विद्यार्थियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान कर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि प्रदेश के युवा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

