एसपी कार्यालय के बाहर ‘फर्जी पत्रकारिता’ का पर्दाफाश: पेड़ के पीछे छिपकर बना रहा था वीडियो, सवालों में घिरते ही भागा तथाकथित यूट्यूबर
रीवा पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के बाहर सोमवार को पत्रकारिता की आड़ में चल रही एक संदिग्ध गतिविधि का पर्दाफाश उस समय हो गया, जब खुद को यूट्यूबर पत्रकार बताने वाला एक व्यक्ति कथित तौर पर प्रयोजित खबर बनाने की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने जब उससे पहचान और संस्थान को लेकर सवाल किए तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका और अंततः घबराकर वहां से निकल गया।
सूत्रों के अनुसार, उक्त व्यक्ति एसपी कार्यालय में किसी फरियादी के माध्यम से एक शिकायत दर्ज कराकर उसे सनसनीखेज खबर का रूप देने की योजना बना रहा था। इसी दौरान कार्यालय परिसर के बाहर मौजूद कुछ पत्रकार आपस में सामान्य बातचीत और हल्के-फुल्के अंदाज में चर्चा कर रहे थे।
बताया जाता है कि इसी बीच वह व्यक्ति पेड़ के पीछे छिपकर पत्रकारों की बातचीत का चोरी-छिपे वीडियो रिकॉर्ड करने लगा, ताकि बाद में उसे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा सके और विवाद खड़ा किया जा सके। हालांकि उसकी यह कोशिश ज्यादा देर तक छिप नहीं सकी।
सवालों में घिरते ही खुलने लगी पोल
मौके पर मौजूद पत्रकारों की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत उससे वीडियो बनाने का कारण पूछा। इसी दौरान एक पत्रकार ने उससे सीधा सवाल किया कि वह किस मीडिया संस्थान या चैनल से जुड़ा हुआ है और किस अधिकार से वहां वीडियो बना रहा है।
लेकिन इन सवालों का उसके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह अपने ही परिचय में उलझ गया और अपने संस्थान का नाम तक स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। सवालों की बौछार होते ही वह असहज हो गया और घबराहट उसके चेहरे पर साफ दिखाई देने लगी।
स्थिति बिगड़ती देख वह व्यक्ति बिना कोई ठोस जवाब दिए धीरे-धीरे वहां से खिसक गया और कुछ ही देर में मौके से गायब हो गया।
पहले भी विवादों में रहा है नाम
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि फोटो में दिखाई देने वाला यह व्यक्ति पहले भी कई विवादों में घिर चुका है। क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाए जाते रहे हैं कि उसके कुछ अवैध कारोबारियों से संबंध होने की बातें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जाता है कि इससे जुड़े कुछ ऑडियो और वीडियो पूर्व में भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें उसकी कार्यशैली और संपर्कों को लेकर सवाल उठाए गए थे।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा
स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भी इस व्यक्ति के कुछ राजनीतिक संपर्क होने की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वह कुछ नेताओं के इशारे पर प्रायोजित खबरें चलाने की कोशिश करता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पत्रकारों ने उठाई कार्रवाई की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय पत्रकारों में नाराजगी देखी गई। पत्रकारों का कहना है कि कुछ लोग फर्जी पहचान और ब्लैकमेलिंग के माध्यम से पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जो पूरे मीडिया जगत के लिए चिंता का विषय है।
पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे तथाकथित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा बनी रह सके।
एसपी कार्यालय के बाहर व्यवस्था पर भी उठे सवाल
घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने सुबह से शाम तक कई लोग पत्रकारिता के नाम पर बैठकर गतिविधियां संचालित करते दिखाई देते हैं। पूरे जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से लोग अपनी सुरक्षा और शोषण की शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंचते हैं।
ऐसे में यदि कार्यालय परिसर के सामने इस तरह की गतिविधियां होती हैं, तो वहां आने वाले फरियादियों के मन में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर क्या धारणा बनती होगी, यह भी एक विचारणीय विषय है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि क्या जिला प्रशासन और संभागीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे कार्यालय परिसर के आसपास अनावश्यक भीड़ और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके।
चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता पर भी बहस
इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता पर बहस को जन्म दिया है। समाज में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, जिसकी जिम्मेदारी सत्ता, प्रशासन और समाज के बीच पारदर्शिता बनाए रखने की होती है।
ऐसे में यदि कुछ लोग निजी स्वार्थ या विवाद पैदा करने के उद्देश्य से पत्रकारिता का नाम इस्तेमाल करते हैं, तो इससे पूरे मीडिया जगत की साख पर असर पड़ता है।
वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया संगठनों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे ऐसे मामलों का संज्ञान लें और पत्रकारिता की मर्यादा बनाए रखने के लिए ठोस पहल करें।
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि समाचार पत्र इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।

