रीवा-मऊगंज में ‘पेबर ब्लॉक’ के नाम पर कमीशनखोरी का बड़ा खेल! पंचायतों में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
रीवा/मऊगंज।
जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि पंचायतों में अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों की अनदेखी कर केवल ‘पेबर ब्लॉक’ निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि इसमें भारी कमीशनखोरी का खेल संचालित हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों एवं जनप्रतिनिधियों की मानें तो रीवा और मऊगंज जिले की कई पंचायतों में योजनाओं के विपरीत जाकर पेबर ब्लॉक का कार्य कराया जा रहा है। यह भी आरोप है कि एक प्रभावशाली बाबू द्वारा रीवा में ‘साइन ट्रेडर्स’ नाम से फर्म संचालित कर इस कार्य को नियंत्रित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पंचायतों में बड़े पैमाने पर सप्लाई और निर्माण कराया जा रहा है।
कमीशन का पूरा गणित तय!
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल में कमीशन का प्रतिशत पहले से ही तय होता है। कथित तौर पर पंचायत स्तर पर 25 प्रतिशत सरपंच, 10 प्रतिशत सचिव, 10 प्रतिशत संबंधित अधिकारियों तथा लगभग 5 प्रतिशत अन्य खर्चों के नाम पर जोड़ा जाता है। इस तरह कुल लगभग 50 प्रतिशत राशि कमीशन में चली जाती है, जबकि शेष राशि से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
कमजोर सरपंचों पर दबाव के आरोप
बताया जा रहा है कि आरक्षित एवं कमजोर वर्ग के सरपंचों पर दबाव बनाकर इन कार्यों को कराया जा रहा है। कई पंचायतों में उनकी सहमति के बिना ही फाइलें तैयार कर कार्य स्वीकृत कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
एक ओर जहां शासन स्तर पर पारदर्शिता और गुणवत्ता का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो कार्यों में गुणवत्ता दिखाई दे रही है और न ही पारदर्शिता। कई जगहों पर पेपर ब्लॉक निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगा है।
अन्य कार्यों की हो रही अनदेखी
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां पीसीसी रोड या अन्य स्थायी निर्माण कार्यों की आवश्यकता है, वहां भी पेपर ब्लॉक का कार्य कराया जा रहा है। इसका मुख्य कारण इसमें अधिक कमीशन की संभावना बताया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, तो कई सफेदपोश और अधिकारी बेनकाब हो सकते हैं, जो दूसरे नामों से फर्म संचालित कर इस खेल में शामिल हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो लंबे समय से चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है और दोषियों पर कार्रवाई संभव है।
रीवा और मऊगंज जिले में विकास कार्यों की दिशा और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे ये सवाल प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाता है या नहीं।


