मऊगंज में अवैध बोरिंग रैकेट पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: दो मशीनें जब्त, माफियाओं में हड़कंप
जल संकट के बीच बिना अनुमति धरती का सीना छलनी कर रहे संचालकों पर शिकंजा, एफआईआर की तैयारी
संजय पांडेय, रीवा/मऊगंज
मऊगंज जिले में तेजी से गिरते भू-जल स्तर और गहराते जल संकट के बीच जिला प्रशासन ने अवैध बोरिंग माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार 4 जून की शाम नईगढ़ी तहसील क्षेत्र में चल रहे अवैध बोरिंग रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया। प्रतिबंध के बावजूद बिना अनुमति धरती का सीना छलनी कर रहे बोरिंग संचालकों पर प्रशासन ने ऐसा शिकंजा कसा कि पूरे जिले में बोरिंग कारोबार से जुड़े लोगों और दलालों में हड़कंप मच गया।
कलेक्टर संजय कुमार जैन के सख्त निर्देश पर राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम नरैनी में छापेमार कार्रवाई करते हुए दो बोरिंग मशीनों को मौके से जब्त कर लिया। प्रशासन की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई को अवैध जल दोहन के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
गोपनीय सूचना पर टीम ने मारा छापा
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन को गोपनीय सूचना मिली थी कि तहसील नईगढ़ी के ग्राम नरैनी में कुशवाहा परिवार की भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध रूप से हैंडपंप एवं बोरिंग उत्खनन कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी तथा थाना प्रभारी ऋषि कुमार द्विवेदी पुलिस बल एवं राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि वाहन क्रमांक KA 01 D 5554 तथा TN 34 M 2255 से संचालित बोरिंग मशीनें बिना किसी अधिकृत परमिशन के उत्खनन कार्य में लगी थीं।
मौके पर ही प्रशासन ने दोनों मशीनों को जब्त करते हुए वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर नईगढ़ी थाना के सुपुर्द कर दिया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी हलचल देखी गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश—‘अब नहीं बख्शे जाएंगे जल माफिया’
तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी ने बताया कि मशीन मालिकों, चालकों एवं इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश थाना प्रभारी को दिए गए हैं। मामले में नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध बोरिंग और भू-जल दोहन करने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
आखिर क्यों लगाया गया है बोरिंग पर प्रतिबंध?
मऊगंज जिले में लगातार नीचे जा रहे भू-जल स्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई क्षेत्रों में जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, जिससे गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराने लगा है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक निश्चित अवधि के लिए हैंडपंप एवं बोरवेल उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है।
आदेश के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में अत्यधिक आवश्यकता हो तो संबंधित व्यक्ति को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से लिखित अनुमति प्राप्त करने के बाद ही उत्खनन की अनुमति दी जाएगी। इसके बावजूद चोरी-छिपे बोरिंग कराने वाले लोग न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, बल्कि जिले के जल भविष्य को भी खतरे में डाल रहे हैं।
सवाल भी खड़े हो रहे हैं...
क्षेत्र में चर्चा इस बात की भी है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद अवैध बोरिंग का यह कारोबार कब से संचालित हो रहा था और किसके संरक्षण में मशीनें खुलेआम गांवों तक पहुंच रही थीं? क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र कमजोर पड़ा है या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी ने माफियाओं के हौसले बुलंद किए?
फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि अब जल संकट से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्ती तय है और अवैध बोरिंग माफियाओं की मनमानी ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाली।


