निर्माण के वर्षों बाद भी अधूरा एनएच-30 और एनएच-35, सुविधाएं नदारद फिर भी जारी टोल वसूली
सर्विस रोड का अभाव, असुरक्षित कट और बढ़ते हादसों से जनता त्रस्त, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
रीवा। जिले में विकास और आधुनिक सड़क नेटवर्क के दावों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 35 (NH-35) की जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। निर्माण कार्य प्रारंभ हुए वर्षों बीत जाने के बावजूद राजमार्ग के कई हिस्सों में अधूरे कार्य, सर्विस रोड का अभाव, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके बावजूद वाहनों से नियमित रूप से टोल टैक्स की वसूली जारी है, जिससे आम नागरिकों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।
जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 2018-20 के दौरान प्रारंभ हुए निर्माण कार्य आज तक पूरी तरह पूर्ण नहीं हो सके हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य अधूरा रहने के बावजूद टोल प्लाजा के माध्यम से लगातार शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि यात्रियों को अपेक्षित सुविधाएं और सुरक्षित आवागमन का वातावरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
सर्विस रोड नहीं, डिवाइडरों में असुरक्षित कट बने हादसों की वजह
क्षेत्रवासियों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग के कई महत्वपूर्ण पुलों और व्यस्त चौराहों के समीप आज तक सर्विस रोड का निर्माण नहीं किया गया है। सर्विस रोड के अभाव में स्थानीय आवागमन के लिए लोगों को मुख्य राजमार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। कई स्थानों पर लोगों की सुविधा के लिए डिवाइडरों को बीच से काटकर अस्थायी और असुरक्षित मार्ग बना दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस प्रकार के अनियोजित कट दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कटों के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। वाहन चालकों को तेज रफ्तार यातायात के बीच अचानक मुड़ने या सड़क पार करने की मजबूरी होती है, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
हरियाली और सौंदर्यीकरण के दावे भी अधूरे
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की शर्तों में सड़क किनारे और डिवाइडरों पर व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करना शामिल होता है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सड़क की सुंदरता और सुरक्षा भी बढ़ाई जा सके। लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों बाद भी इस मार्ग पर अपेक्षित स्तर पर वृक्षारोपण नहीं किया गया है।
गर्मी के मौसम में सड़क के दोनों ओर धूल और सूखे वातावरण के कारण यात्रियों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर हरित पट्टी विकसित की जाती तो क्षेत्र का पर्यावरण भी बेहतर होता और सड़क की उपयोगिता भी बढ़ती।
टोल के बदले सुविधाएं नहीं मिलने से बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय जनता का आरोप है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निर्मित इस परियोजना में आम नागरिकों से लगातार टोल टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें सुरक्षित और पूर्ण विकसित सड़क उपलब्ध नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि जब सड़क निर्माण और आवश्यक सुविधाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं, तब टोल वसूली की वैधता और औचित्य पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि वे प्रत्येक यात्रा में टोल शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन उन्हें अधूरी सड़क, अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था और दुर्घटनाओं का खतरा झेलना पड़ता है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन न तो संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं देते।
जनता का कहना है कि यदि समय रहते सर्विस रोड निर्माण, डिवाइडरों के असुरक्षित कटों को बंद करने, वृक्षारोपण और अन्य अधूरे कार्यों को पूरा नहीं किया गया तो भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है।

