पतंजलि पब्लिक स्कूल में छात्र पर जानलेवा हमले का आरोप: छह माह से कोमा में जिंदगी की जंग लड़ रहा आर्यन, परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
प्राचार्य, उप प्राचार्य और छात्र के खिलाफ थाने में दी शिकायत, 14 लाख से अधिक खर्च होने के बावजूद नहीं लौटी होश की स्थिति, न्याय की गुहार
गढ़, रीवा। जिले के गढ़ स्थित पतंजलि पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 11वीं के छात्र आर्यन गुप्ता के साथ कथित रूप से हुई मारपीट का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। करीब छह माह पूर्व स्कूल परिसर में हुई इस घटना के बाद से आर्यन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। पीड़ित परिवार ने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और एक छात्र द्वारा किए गए कथित हमले को लेकर गढ़ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित छात्र के पिता श्रवण कुमार गुप्ता द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, 5 दिसंबर 2025 को उनका पुत्र आर्यन गुप्ता, जो पतंजलि पब्लिक स्कूल में कक्षा 11वीं का छात्र है, स्कूल परिसर में मौजूद था। इसी दौरान उसी स्कूल के छात्र नागेंद्र तिवारी ने कथित रूप से आर्यन के साथ मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि आर्यन जमीन पर गिर गया और उसके सिर में गंभीर चोट लग गई, जिससे उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और न ही छात्र को तत्काल समुचित चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई। परिजनों के मुताबिक, आर्यन को पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिलाया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे रीवा के अस्पताल और बाद में नागपुर रेफर करना पड़ा, जहां उसका लंबे समय से इलाज चल रहा है।
परिवार का दावा है कि घटना के बाद से आर्यन अब तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है और पिछले लगभग छह माह से अस्पताल में गंभीर अवस्था में भर्ती है। उसके उपचार में अब तक लगभग 14 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है। लगातार इलाज और आर्थिक बोझ के कारण पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में पतंजलि पब्लिक स्कूल के प्राचार्य प्रदीप कुमार ओझा, उप प्राचार्य अनिल त्रिपाठी और छात्र नागेंद्र तिवारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का आरोप है कि घटना स्कूल परिसर के भीतर हुई, इसलिए स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। उनका कहना है कि यदि समय रहते छात्र को बेहतर चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाती, तो संभवतः उसकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें पीड़ित परिवार ने आर्यन के लिए न्याय की मांग करते हुए स्कूल प्रबंधन की कथित लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि स्कूल प्रबंधन ने कथित तौर पर यह कहा कि यदि स्कूल के अंदर कोई छात्र किसी अन्य छात्र को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की नहीं है। इस कथित बयान के सामने आने के बाद क्षेत्र में अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी विद्यालय परिसर में छात्र सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है।
गढ़ थाना पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

