रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर बढ़ा विरोध, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
रोझौही-क्योटी क्षेत्र की 167 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ नागरिकों ने उठाए सवाल, जल संकट, पर्यावरण और पर्यटन पर जताई चिंता
रीवा, विशेष संवाददाता।
रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र अंतर्गत रोझौही-क्योटी भूभाग में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर जनविरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन संभागायुक्त रीवा के माध्यम से सौंपते हुए परियोजना पर पुनर्विचार की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि विकास और ऊर्जा उत्पादन देश की आवश्यकता है, किंतु किसी भी बड़ी परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय आबादी, पर्यावरण, जल संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के हितों का समुचित आकलन किया जाना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना यदि बिना व्यापक जनसहमति और पारदर्शी अध्ययन के लागू की गई तो क्षेत्र को गंभीर सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
जल संकट को लेकर सबसे बड़ी चिंता
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि रीवा और विंध्य क्षेत्र पहले से ही जल संकट की समस्या से जूझ रहा है। गर्मी के मौसम में कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। नागरिकों का तर्क है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में शीतलन (कूलिंग) के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि क्षेत्र के सीमित जल संसाधनों का उपयोग संयंत्र के लिए किया गया तो कृषि, पशुपालन और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
क्योटी जलप्रपात और पर्यटन पर प्रभाव की आशंका
स्थानीय लोगों ने प्रसिद्ध क्योटी जलप्रपात को क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर बताते हुए कहा है कि परियोजना का प्रभाव पर्यटन गतिविधियों और आसपास के पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है। ज्ञापन में मांग की गई है कि किसी भी निर्णय से पहले स्वतंत्र पर्यावरणीय अध्ययन कराया जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
परमाणु दुर्घटनाओं का हवाला
ज्ञापन में विश्व की प्रमुख परमाणु दुर्घटनाओं—चेर्नोबिल (यूक्रेन), फुकुशिमा (जापान), थ्री माइल आइलैंड (अमेरिका), एसएल-1 (अमेरिका) और टोकाइमुरा (जापान)—का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि तकनीकी सुरक्षा के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं किए जा सकते। नागरिकों का कहना है कि इन घटनाओं से यह सीख मिलती है कि परमाणु परियोजनाओं में सुरक्षा, पारदर्शिता और आपदा प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सौर ऊर्जा को बताया बेहतर विकल्प
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि रीवा पहले से ही देश की सबसे चर्चित सौर ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल रहा है। इसलिए क्षेत्र में सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। नागरिकों का मानना है कि इससे ऊर्जा उत्पादन भी होगा और पर्यावरणीय जोखिम भी कम रहेंगे।
नागरिकों की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं—
1. प्रस्तावित परियोजना की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
2. प्रभावित गांवों में व्यापक एवं पारदर्शी जनसुनवाई आयोजित की जाए।
3. स्वतंत्र पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) कराया जाए।
4. जल संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।
5. स्थानीय नागरिकों की सहमति के बिना किसी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया न की जाए।
6. सौर एवं अन्य हरित ऊर्जा विकल्पों पर प्राथमिकता से विचार किया जाए।
प्रशासन और सरकार से अपेक्षा
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर खुली चर्चा कराई जाए तथा स्थानीय जनता की आशंकाओं का समाधान किया जाए।
ज्ञापन के साथ क्षेत्र के सैकड़ों नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त समर्थन पत्र भी संलग्न किए गए हैं। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें केंद्र एवं राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

