गढ़ ग्राम पंचायत में ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ बना औपचारिकता? घंटों इंतजार करती रही जनता, सरपंच-सचिव नदारद, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
रीवा/गंगेव, 5 जून 2026।
एक ओर सरकार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ में यह आयोजन महज खानापूर्ति और कागजी औपचारिकता बनकर रह गया। स्थानीय ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर गंभीर लापरवाही, उदासीनता और योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, 5 जून 2026 को ग्राम पंचायत गढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेष ग्राम सभा एवं पर्यावरण कार्यक्रम आयोजित होने की सूचना दी गई थी। पंचायत भवन में पोस्टर और सूचना तो लगाई गई, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वे सुबह करीब 11 बजे से पंचायत परिसर में एकत्रित होकर आयोजन शुरू होने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन शाम 4 बजे तक न तो सरपंच पहुंचे और न ही सचिव। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर केवल “दिखावे के लिए कार्यक्रम” दर्शाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर न कोई सफाई अभियान चला, न पौधारोपण हुआ और न ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई दी। लोगों का कहना है कि विशेष ग्राम सभा केवल कागजों में पूर्ण कर ली गई, जबकि मौके पर स्थिति बदहाल बनी रही।
स्कूलों, सड़कों और शासकीय कार्यालयों के बाहर कचरे का अंबार
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि ग्राम पंचायत गढ़ में स्कूल परिसरों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर खुले में कचरे का ढेर लगा हुआ है, जिससे संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से लेकर विभिन्न शासकीय कार्यालयों के सामने तक गंदगी फैली हुई दिखाई देती है, लेकिन पंचायत प्रशासन की ओर से कोई ठोस सफाई व्यवस्था नहीं की जा रही।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब विश्व पर्यावरण दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी पंचायत सफाई और पौधारोपण जैसे मूल कार्य नहीं करा सकी, तो आम दिनों में पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर प्रशासन कितना गंभीर होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
“गढ़ का विकास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा” — ग्रामीणों के गंभीर आरोप
ग्राम पंचायत गढ़ के कई नागरिकों ने पंचायत प्रशासन, विशेषकर सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत विकास कार्यों की गति वर्षों से प्रभावित है। ग्रामीणों का आरोप है कि गढ़ में पदस्थ सचिव पूर्व में लोरी खुर्द, बाबूपुर, तेंदुआ सहित अन्य पंचायतों में भी कार्य कर चुके हैं, जहां विकास कार्य अधूरे रहने और योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि कई विकास कार्यों में राशि निकासी होने के बावजूद जमीनी कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शासकीय स्तर पर होना शेष है।
“जांच हुई, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गईं तथा कुछ मामलों में जांच की बात भी सामने आई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जनता को जमीनी हकीकत स्पष्ट दिखाई दे रही है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को आखिर क्यों नहीं दिख रही? क्या शिकायतें केवल फाइलों तक सीमित हैं? या फिर जिम्मेदार तंत्र किसी बड़े दबाव अथवा उदासीनता का शिकार है?
गांधी के ग्राम स्वराज का सपना अधूरा?
ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम स्वराज की कल्पना महात्मा गांधी ने की थी, वहां पंचायतें विकास की धुरी मानी जाती हैं, लेकिन यदि स्थानीय स्तर पर जवाबदेही ही समाप्त हो जाए और जनप्रतिनिधि व अधिकारी आमजन से दूरी बना लें, तो गांवों के विकास की कल्पना अधूरी ही रह जाएगी।
अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत गंगेव, जिला पंचायत रीवा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं, तथा ग्राम पंचायत गढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस के आयोजन और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।




