रीवा संभाग में शराब माफिया पर कार्रवाई जारी, लेकिन जमीनी चुनौतियां बरकरार
कटरा-गढ़ क्षेत्र की हालिया घटना ने उठाए कई सवाल, पुलिस की सूझबूझ से टली बड़ी अनहोनी
रीवा। रीवा संभाग में अवैध शराब कारोबार, मेडिकल नशे, अवैध खनिज उत्खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आबकारी अमले की संयुक्त कार्रवाई के बीच कई बार बड़े खुलासे भी सामने आए हैं, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या जमीनी स्तर पर इन अवैध कारोबारों पर प्रभावी अंकुश लग पाया है, अथवा कार्रवाई केवल सीमित दायरे तक ही सिमट कर रह जाती है।
रीवा जिले के ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में अवैध शराब कारोबार लंबे समय से प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। विशेष रूप से कटरा और गढ़ क्षेत्र के अंतर्गत हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जनचर्चाओं और स्थानीय सूत्रों के अनुसार जून माह में गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कटरा इलाके में कथित रूप से अवैध शराब परिवहन की सूचना पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई। बताया जाता है कि मौके पर पहुंचे पुलिस बल को कथित शराब कारोबारियों के विरोध और तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम के साथ कथित रूप से उलझने की कोशिश की गई। हालांकि, पुलिस की तत्परता और सूझबूझ के कारण हालात नियंत्रण में बने रहे। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित न किया जाता, तो कोई गंभीर घटना घटित हो सकती थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कटरा क्षेत्र पहले भी तनावपूर्ण घटनाओं का केंद्र रहा है। लोगों को पूर्व में हुई उस घटना की याद आज भी है, जब कथित विवाद के दौरान एक जवान घायल हो गया था और कटरा बाजार क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बन गया था। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि अवैध कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं रह गया है, बल्कि कई बार यह कानून-व्यवस्था के लिए भी सीधी चुनौती बनता दिखाई देता है।
जानकारों का मानना है कि शराब माफिया, मेडिकल नशा कारोबार और अवैध खनिज परिवहन जैसे मामलों में कार्रवाई तभी प्रभावी हो सकती है, जब निचले स्तर तक मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर निगरानी हो। अक्सर यह आरोप भी सामने आते हैं कि कुछ मामलों में कार्रवाई शुरू तो होती है, लेकिन बाद में विभिन्न कारणों से उसकी गति धीमी पड़ जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाए जाते रहे हैं, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना अभी भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभागों को उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश और कठोर निगरानी मिले, तो कई स्थानों पर संचालित कथित अवैध कारोबारों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
अब निगाहें संभागीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। नागरिकों की अपेक्षा है कि
संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर रीवा, पुलिस अधीक्षक रीवा तथा संबंधित आबकारी विभाग जमीनी स्तर पर जांच कर तथ्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि अवैध कारोबारों पर अंकुश लग सके और आमजन में कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो।

