Breaking: विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन, पर्यावरण संरक्षण के लिए बना एक्शन प्लान
प्रख्यात वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दी वैज्ञानिक प्रस्तुति, देशभर से जुड़े सैकड़ों प्रतिभागी
जल प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट पर हुई गंभीर चर्चा
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष वेबीनार का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं सैकड़ों प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, औद्योगीकरण, जलवायु परिवर्तन और जनभागीदारी आधारित समाधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। अंततः सर्वसम्मति से पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी “एक्शन प्लान” तैयार कर धरातल पर कार्य करने की सहमति बनी।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री सम्मानित समाज चिंतक बाबूलाल दहिया, गुजरात के वरिष्ठ पर्यावरणविद महेश पंड्या, प्रसिद्ध आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं पर्यावरण चिंतक वीरेंद्र कुमार ठक्कर, छत्तीसगढ़ से सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, ग्वालियर से पर्यावरण कार्यकर्ता राज तिवारी, बुरहानपुर से हरीश प्रसाद सोलंकी सहित देशभर के सैकड़ों एक्टिविस्ट और प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
कार्यक्रम का सफल संचालन सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया, जिन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों पर सामूहिक जनजागरण और संवेदनशील हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
“जीवन के लिए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक” – वीरेंद्र कुमार ठक्कर
उत्तराखंड के प्रसिद्ध आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं टिहरी गढ़वाल विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस एवं तकनीक के विशेषज्ञ वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने अपने विस्तृत स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से वैश्विक पर्यावरणीय संकट की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि बीते कई दशकों में औद्योगिक विस्तार, अंधाधुंध खनन, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और बढ़ते प्रदूषण ने पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है।
उन्होंने आंकड़ों और वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से बताया कि वायु, जल और भूमि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते ग्लोबल वार्मिंग, तापमान वृद्धि, अनियमित मौसम, जल संकट तथा जैव विविधता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उनका कहना था कि वर्तमान में तापमान में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि केवल प्राकृतिक बदलाव नहीं बल्कि मानवीय गतिविधियों से बढ़े प्रदूषण का परिणाम है, जिसका गंभीर प्रभाव भारत सहित पूरे विश्व पर दिखाई दे रहा है।
वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने चिंता जताते हुए कहा कि आज खनिज संपदा के दोहन के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है। खेती योग्य भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र लगातार सिकुड़ता जा रहा है। दूसरी ओर जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भविष्य में खाद्यान्न संकट की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण नई-नई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और मानव जीवन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसलिए केवल प्रतीकात्मक आयोजन नहीं बल्कि ठोस कार्ययोजना बनाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
जल प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने पर झेलना पड़ा उत्पीड़न – हरीश सोलंकी
वेबीनार में बुरहानपुर से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हरीश प्रसाद सोलंकी ने जल प्रदूषण के खिलाफ अपनी संघर्षगाथा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने क्षेत्र की नदियों और नालों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर लगातार शिकायतें कीं और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल प्रदूषण के मामलों को उजागर करने के कारण उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उनके विरुद्ध कथित रूप से फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए, मारपीट की गई तथा जेल तक भेजा गया। हरीश सोलंकी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली में की, जिसके बाद आयोग के हस्तक्षेप से मामले की जांच हुई और उन्हें एक लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया। साथ ही आगे की वैधानिक कार्रवाई भी प्रचलन में है।
अनुभवों के साथ साझा हुए समाधान के सुझाव
छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, ग्वालियर से राज तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। वक्ताओं ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और जनजागरूकता को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
वेबीनार के अंत में पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी शिकायतों पर प्रभावी निगरानी रखने, जल स्रोतों के संरक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर सहमति व्यक्त की गई।




